फर्जी रिजल्ट, भ्रामक विज्ञापन और छात्रों के नाम पर करोड़ों का खेल उजागर
कोचिंग कारोबार की ‘सफलता फैक्ट्री’ पर सीसीपीए का शिकंजा

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
देशभर में छात्रों और अभिभावकों को सपनों की बिक्री करने वाले कोचिंग संस्थानों पर अब केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) का शिकंजा कसता दिख रहा है। सीसीपीए ने भ्रामक विज्ञापनों, झूठे सफलता दावों और अनुचित व्यापार प्रथाओं के आरोप में कई बड़े कोचिंग संस्थानों पर कार्रवाई करते हुए भारी जुर्माना लगाया है। मोशन एजुकेशन पर 10 लाख रुपये और सीकर स्थित करियर लाइन कोचिंग (सीएलसी) पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
जांच में सामने आया कि कई संस्थान छात्रों की सफलता का श्रेय लेने के लिए उनके नाम और तस्वीरों का इस्तेमाल कर रहे थे, जबकि वास्तविकता में वे छात्र केवल टेस्ट सीरीज या फ्री ऑनलाइन बैच से जुड़े थे। कई मामलों में परीक्षा परिणाम आने के बाद दाखिला लेने वाले छात्रों को भी विज्ञापनों में “अपने छात्र” बताकर प्रचार किया गया। इससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या देश का कोचिंग उद्योग शिक्षा से ज्यादा मार्केटिंग और भ्रम फैलाने का कारोबार बन चुका है।
सीसीपीए की जांच में यह भी सामने आया कि संस्थानों ने अभिभावकों और छात्रों की लिखित सहमति तक नहीं ली। “मोशन है तो सिलेक्शन है” जैसे बड़े दावे बिना ठोस प्रमाण के प्रचारित किए गए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के विज्ञापन छात्रों और अभिभावकों पर मानसिक दबाव बनाते हैं और लाखों रुपये खर्च करने के लिए मजबूर करते हैं।
सबसे गंभीर बात यह है कि सीसीपीए ने अब तक 60 से अधिक नोटिस जारी किए हैं और 31 कोचिंग संस्थानों पर 1.39 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया जा चुका है। इससे स्पष्ट होता है कि शिक्षा के नाम पर बड़े पैमाने पर भ्रामक प्रचार का नेटवर्क चल रहा था।
आलोचकों का कहना है कि वर्षों से कोचिंग माफिया छात्रों की मेहनत और अभिभावकों की मजबूरी को कमाई का जरिया बना चुके हैं। अब सवाल यह है कि क्या केवल जुर्माना पर्याप्त है या फिर ऐसे संस्थानों के खिलाफ और कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।


