राष्ट्रीय

भारत का हरित शंखनाद: ‘प्रमाण’ सर्टिफिकेट से सतत वन प्रबंधन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा

पर्यावरण संरक्षण में ऐतिहासिक मील का पत्थर

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क |

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने नई दिल्ली में ‘भारतीय वन और लकड़ी प्रमाणन योजना’ (IFWCS) के अंतर्गत देश के पहले ‘पीआरएएमएएएम’ (PRAMAAM – प्रमाण) प्रमाणपत्र प्रदान किए। भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (IIFM), भोपाल द्वारा आयोजित इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश वन विकास निगम और ओडिशा के एक बांस किसान को यह प्रतिष्ठित प्रमाणपत्र सौंपा गया।

वैश्विक बाजार और ‘वोकल फॉर लोकल’ का विजन

श्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि ‘प्रमाण’ केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि भारतीय उत्पादकों, निर्यातकों और वन-आधारित उद्यमों के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरने का सशक्त जरिया है। वनों की कटाई से मुक्त लकड़ी के स्रोत (Deforestation-free Timber) की वैश्विक मांग को पूरा करते हुए, यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल एंड एक्ट ग्लोबल’ के दृष्टिकोण को साकार करती है।

पारदर्शिता और तृतीय-पक्ष ऑडिट पर आधारित

प्रमाणन की यह प्रक्रिया राष्ट्रीय कार्य योजना संहिता (NWPC) 2023 के सिद्धांतों पर आधारित है। यह केवल स्व-घोषणा न होकर ‘क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया’ (QCI) के अंतर्गत मान्यता प्राप्त प्रमाणन निकायों द्वारा किए जाने वाले निष्पक्ष और स्वतंत्र ऑडिट पर टिकी है। इससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के बीच भारतीय उत्पादों की विश्वसनीयता और साख में भारी वृद्धि होगी।

आजीविका और ‘विकसित भारत 2047’ का मार्ग

‘प्रमाण’ को एक व्यापारिक साधन के साथ-साथ एक आजीविका मिशन बताते हुए केंद्रीय मंत्री ने रेखांकित किया कि इससे जनजातीय समुदायों, छोटे किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों और गैर-लकड़ी वन उत्पाद संग्राहकों को सीधा लाभ मिलेगा। यह पहल आर्थिक प्रगति को पारिस्थितिक संतुलन के साथ जोड़ते हुए ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को मजबूती प्रदान करती है।

Related Articles

Back to top button