
पीएम-एमकेएसएसवाई से जोखिम प्रबंधन को नई दिशा
बीमारी, बाढ़ और जलवायु जोखिम से सुरक्षा पर जोर
निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
भारत में तेजी से विस्तार कर रहे जलीय कृषि क्षेत्र के सामने उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ बीमारी, बाढ़, चक्रवात और जलवायु संबंधी जोखिमों की चुनौती भी बढ़ रही है। ऐसे में प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (पीएम-एमकेएसएसवाई) के तहत जलीय कृषि बीमा को किसानों के लिए वित्तीय सुरक्षा के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में विकसित किया जा रहा है।
उत्पादन ने पकड़ी रफ्तार
भारत का मछली उत्पादन वर्ष 2013-14 के 9.6 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 19.8 मिलियन टन हो गया। इसी अवधि में अंतर्देशीय मछली उत्पादन 6.1 मिलियन टन से बढ़कर 14.74 मिलियन टन हुआ। भारत अब लगभग 8 प्रतिशत वैश्विक हिस्सेदारी के साथ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है।
जोखिम भी बढ़े
जलीय कृषि के विस्तार के साथ रोगों का प्रकोप, प्रदूषण, बाढ़, चक्रवात, भूकंप और अन्य प्राकृतिक आपदाएं किसानों के निवेश और आय को प्रभावित कर सकती हैं। छोटे और सीमांत किसानों के लिए एक फसल चक्र का नुकसान लंबे समय तक वित्तीय दबाव पैदा कर सकता है।
बीमा पर सरकार का जोर
सरकार ने 8 फरवरी 2024 को पीएम-एमकेएसएसवाई को मंजूरी दी थी। इसके घटक 1-बी के तहत जलीय कृषि बीमा अपनाने वाले पात्र किसानों को बीमा प्रीमियम लागत का 40 प्रतिशत तक प्रोत्साहन दिया जा रहा है। लाभ राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से डीबीटी के जरिए पहुंचाया जाता है।
तालाब आधारित जलीय कृषि में प्रोत्साहन जल प्रसार क्षेत्र के प्रति हेक्टेयर अधिकतम ₹25,000 तक है। अधिकतम ₹1 लाख का प्रोत्साहन चार हेक्टेयर तक के क्षेत्र के लिए उपलब्ध है। एक हेक्टेयर से कम क्षेत्र के लिए लाभ आनुपातिक आधार पर दिया जाता है।
महिला और कमजोर वर्गों को अतिरिक्त लाभ
केज कल्चर, आरएएस, बायोफ्लॉक और रेसवे जैसी प्रणालियों के लिए भी प्रीमियम पर 40 प्रतिशत तक प्रोत्साहन का प्रावधान है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला लाभार्थियों को सामान्य श्रेणी के प्रोत्साहन के अतिरिक्त 10 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाता है।
दावे के लिए समयसीमा
बीमित जोखिम होने पर किसान को तत्काल बीमा कंपनी को सूचना देनी होती है। नुकसान के आकलन के बाद दावा प्रक्रिया पूरी की जाती है। झींगा पालन के दावों का निपटान 30 दिनों और अन्य जलीय कृषि गतिविधियों का 45 दिनों के भीतर पूरा करने का प्रावधान है।
316 आवेदन, 127 मंजूर
योजना के तहत अब तक 316 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें 730.61 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है। 127 आवेदनों को मंजूरी देकर 321.74 हेक्टेयर क्षेत्र के किसानों को लाभ दिया गया है। कुल 40.03 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि वितरित की जा चुकी है।
वर्तमान में चार बीमा कंपनियां जलीय कृषि बीमा कवरेज उपलब्ध करा रही हैं और निजी बीमा कंपनियों को भी जोड़ने की प्रक्रिया जारी है। उद्देश्य जलीय किसानों के लिए ऐसा बीमा तंत्र विकसित करना है, जो नुकसान की घड़ी में वित्तीय सहारा देने के साथ पूरे मत्स्य क्षेत्र को अधिक लचीला और टिकाऊ बनाने में मदद करे।
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