नीतिगत सुधारों से बदला भारत का कारोबारी माहौल, 5 साल में 27% बढ़े व्यवसाय पंजीकरण
— निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क | डी.एफ. हिंदी

स्टार्टअप, एमएसएमई और निवेशकों के लिए सरकार ने खोले अवसरों के नए द्वार
भारत में बीते एक दशक के दौरान लागू किए गए नीतिगत और संरचनात्मक सुधारों ने देश के व्यावसायिक वातावरण को व्यापक रूप से बदल दिया है। सरकार की “व्यवसाय करने में सुगमता” (Ease of Doing Business) नीति के तहत किए गए कदमों का प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार भारत में व्यवसाय पंजीकरण की संख्या वर्ष 2020-21 में 1.55 लाख से बढ़कर 2025-26 में 1.98 लाख तक पहुंच गई है, जो लगभग 27 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि केवल आंकड़ों का खेल नहीं बल्कि भारत के बदलते कारोबारी माहौल का संकेत है। निवेशकों और उद्यमियों के बीच बढ़ता भरोसा इस बात को साबित करता है कि सरकार की सुधारवादी नीतियां आर्थिक गतिविधियों को गति देने में सफल हो रही हैं।
केंद्रीय बजट 2026-27 में भी व्यापार और निवेश को प्रोत्साहन देने के लिए कई महत्वपूर्ण उपाय प्रस्तावित किए गए हैं। इनमें डिजिटल व्यापार सुगमता, कर-निश्चितता, नियमों में कमी, विश्वास आधारित सीमा शुल्क प्रणाली और निवेश-अनुकूल कर ढांचा शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य एक ऐसा कारोबारी इकोसिस्टम तैयार करना है जो पारदर्शी, सरल और वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक हो।
भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम ने भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। फरवरी 2026 तक 2.16 लाख से अधिक स्टार्टअप उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) से मान्यता प्राप्त कर चुके हैं। स्टार्टअप इंडिया जैसी योजनाओं ने युवाओं और नवाचार-आधारित उद्यमिता को बढ़ावा दिया है। इन स्टार्टअप्स को कर छूट, आसान अनुपालन, बौद्धिक संपदा अधिकारों के त्वरित निपटान और निवेश तक बेहतर पहुंच जैसे कई लाभ मिल रहे हैं।
सरकार द्वारा एमएसएमई क्षेत्र को भी विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। ऋण गारंटी योजनाओं और डिजिटल ऋण आकलन मॉडल के जरिए छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए वित्त तक पहुंच आसान बनाई गई है। इससे न केवल उद्यमिता को बढ़ावा मिल रहा है बल्कि रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को भी गति मिल रही है।
इसके साथ ही विनियामक सुधारों के तहत जन विश्वास कानून, दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC) तथा विभिन्न कर और श्रम सुधारों को लागू किया गया है। इन कदमों का उद्देश्य व्यवसायों पर अनुपालन बोझ को कम करना और एक भरोसेमंद प्रशासनिक व्यवस्था विकसित करना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यही सुधार गति बनाए रखते हैं तो भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक व्यापार और निवेश का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है।



