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आरबीआई का बड़ा चाबुक: नियम तोड़े, साख पर धब्बा!

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

देश के वित्तीय नियामक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बार फिर गैर-जिम्मेदार कॉर्पोरेट रवैये पर कड़ा प्रहार किया है। 24 सितंबर 2026 को जारी एक तीखे आदेश में ओला फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (Ola Financial Services) पर कानूनी चाबुक चलाते हुए ₹3.10 लाख का मौद्रिक जुर्माना ठोका गया है।

केवाईसी नियमों की अनदेखी: सुरक्षा व्यवस्था में लगी सेंध

यह अनुशासनात्मक कार्रवाई ‘नो योर कस्टमर’ (KYC) से जुड़े महत्वपूर्ण निर्देशों का खुलेआम उल्लंघन करने पर की गई है। भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 (Payment and Settlement Systems Act, 2007) की धारा 30(1) सह-पठित धारा 26(6) के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए नियामक ने कंपनी की लापरवाही को बेनकाब किया है।

निरीक्षण में खुलासा: वित्तीय मानकों पर लापरवाही

आरबीआई द्वारा जनवरी 2025 से नवंबर 2025 के संचालन अवधि के दौरान किए गए वैधानिक निरीक्षण में कई गंभीर कमियां उजागर हुईं। कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर दिया गया, लेकिन उनकी दलीलें और मौखिक स्पष्टीकरण केंद्रीय बैंक को संतुष्ट करने में विफल रहे।

ग्राहकों का जोखिम वर्गीकरण ठप: बड़ा संकट

सुपरवाइजरी जांच में यह सबसे गंभीर आरोप सही साबित हुआ कि ओला फाइनेंशियल सर्विसेज अपने कई ग्राहकों का ‘रिस्क कैटेगराइजेशन’ (जोखिम वर्गीकरण) करने में पूरी तरह नाकाम रही। वित्तीय सुरक्षा चक्र से ऐसा खिलवाड़ किसी भी जिम्मेदार संस्था के लिए बेहद शर्मनाक है।

नियामक का सीधा संदेश: आगे और कस सकता है शिकंजा

आरबीआई ने साफ किया है कि यह कार्रवाई नियामक अनुपालन में विफलता के लिए है। हालांकि, यह जुर्माना कंपनी के खिलाफ अन्य कानूनी या अनुशासनात्मक कार्यवाहियों का मार्ग बंद नहीं करता।

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