
साइबर फ्रॉड और डीपफेक पर कड़ा प्रहार!
निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026 के महामंच के ठीक पहले देश की राजधानी दिल्ली में तकनीकी कूटनीति का एक नया इतिहास रचा गया है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्युनिकेशन एसोसिएशन (GSMA) के शीर्ष बोर्ड सदस्यों के साथ सेवा तीर्थ में एक उच्चस्तरीय और बेहद महत्वपूर्ण बैठक की। इस दौरान केंद्रीय संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी भी उपस्थित रहे। वैश्विक मोबाइल इकोसिस्टम के दिग्गजों के साथ हुई इस चर्चा ने यह साबित कर दिया कि आज भारत केवल एक उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि विश्व पटल पर डिजिटल क्रांति का निर्विवाद अगुआ बन चुका है।
तकनीक बने समावेशी विकास का हथियार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में दो टूक शब्दों में रेखांकित किया कि तकनीक का मूल उद्देश्य समावेशी और सतत विकास होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ‘डिजिटल डिवाइड’ (डिजिटल खाई) को पाटने के लिए तकनीक का लोकतंत्रीकरण अनिवार्य है, ताकि ग्लोबल साउथ और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक डिजिटल सेवाएं सस्ती और सुलभ दरों पर पहुँच सकें। भारत के डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) की ताकत को सराहते हुए उन्होंने इसे विकासशील देशों के लिए एक क्रांतिकारी स्प्रिंगबोर्ड बताया।
साइबर फ्रॉड और डीपफेक के खिलाफ वैश्विक जंग
वर्तमान समय की सबसे भीषण चुनौती बन चुके साइबर फ्रॉड और डिजिटल धोखाधड़ी पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री ने तकनीक-आधारित ठोस समाधानों की मांग की। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के इस दौर में डीपफेक और फर्जी सामग्री की बढ़ती महामारी से निपटने के लिए ऐसे सुरक्षा तंत्र विकसित करने का आह्वान किया जिससे उपयोगकर्ता पल भर में मूल स्रोत की पहचान कर सकें।
वैश्विक मंच पर भारत के नेतृत्व की गूंज
जीएसएमए बोर्ड के सदस्यों ने भारत में 4G-5G के रिकॉर्ड विस्तार, विनिर्माण और डीपीआई के विशालकाय स्वरूप की भूरी-भूरी प्रशंसा की। केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में बार्सिलोना से लेकर दिल्ली तक चल रहे वैश्विक वार्ताओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य की 6G तकनीक, एआई सुरक्षा और सुरक्षित डिजिटल बुनियादी ढांचे की दिशा में भारत अब दुनिया का मार्गदर्शक बन चुका है।



