उत्तर प्रदेश

34वें स्थापना दिवस पर कर्मचारियों ने पीडब्ल्यूडी में विलय की मांग दोहराई

सेतु निगम कर्मचारी यूनियन ने उठाई नियमितीकरण और वेतन सुधार की मांग

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

Uttar Pradesh Rajya Setu Nigam Employees Union के 34वें स्थापना दिवस तथा केंद्रीय कार्यकारिणी के 17वें द्विवार्षिक अधिवेशन एवं चुनाव (2026-28) के अवसर पर बुधवार को सेतु निगम मुख्यालय परिसर में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन यूनियन के केंद्रीय महामंत्री Shishir Kumar Gupta ने किया।

इस अवसर पर प्रदेश के कई वरिष्ठ कर्मचारी नेताओं और संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में Ishrat Jah, केंद्रीय अध्यक्ष, सेतु निगम इम्प्लाइज यूनियन ने कर्मचारियों की विभिन्न लंबित मांगों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में प्रबंधन और यूनियन के बीच हुए समझौतों पर अभी तक पूरी तरह अमल नहीं हो सका है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है।

यूनियन ने विशेष रूप से वर्ष 2001 से पहले कार्यरत ग्रुप-बी और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग को दोहराया। कर्मचारियों का कहना है कि 25 से 35 वर्षों तक सेवा देने के बावजूद अब तक नियमितीकरण नहीं होने से उनमें भारी नाराजगी है। यूनियन ने चिकित्सा प्रतिपूर्ति, अवकाश नकदीकरण और अन्य सेवा सुविधाएं तत्काल लागू करने की मांग की।

सभा में यह भी कहा गया कि प्रबंध निदेशक द्वारा पूर्व में दिए गए निर्देशों के बावजूद ग्रुप-बी कर्मचारियों के हित में प्रस्तावों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो पाई है। यूनियन ने मांग की कि इन मामलों को शीघ्र निदेशक मंडल की बैठक में रखकर निर्णय लिया जाए।

इसके अलावा वेतन समिति-2008 की संस्तुतियों के अनुसार संशोधित ग्रेड वेतन लागू करने की मांग भी उठाई गई। यूनियन ने कहा कि Uttar Pradesh Rajkiya Nirman Nigam की तर्ज पर सेतु निगम कर्मचारियों को भी संशोधित ग्रेड वेतन का लाभ दिया जाना चाहिए।

कार्यक्रम में प्रदेश स्तरीय कर्मचारी संगठनों के नेताओं ने कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए एकजुटता दिखाई। कई वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों को यूनियन की ओर से सम्मानित भी किया गया।

यूनियन ने एक बार फिर Uttar Pradesh Public Works Department में सेतु निगम के विलय की मांग दोहराई। यूनियन का कहना है कि लोक निर्माण विभाग में कर्मचारियों की कमी और सेतु निगम में घटती जनशक्ति को देखते हुए दोनों विभागों का विलय कर्मचारियों और सरकार दोनों के हित में होगा।

यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि यदि सरकार सकारात्मक निर्णय लेती है तो कर्मचारियों का असंतोष समाप्त होगा और औद्योगिक शांति कायम रहेगी। साथ ही सेतु निगम की प्रगति और कार्यक्षमता को भी नई गति मिलेगी।

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