अदृश्य ढाल: कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक अरब से अधिक भारतीयों की पहचान कैसे सुरक्षित कर रही है

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने भारत के डिजिटल सुरक्षा ढांचे को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। प्राधिकरण ने अगली पीढ़ी की एआई-सक्षम बायोमेट्रिक डुप्लीकेशन हटाने तथा दस्तावेज़ सत्यापन प्रणाली लागू की है, जिससे नामांकन और अद्यतन लेनदेन की सटीकता एवं दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
यह “अदृश्य ढाल” भारत के डिजिटल सुरक्षा मिशन में एक नया अध्याय है। यह बहुस्तरीय एआई रक्षा प्रणाली अरबों गणनाएं कर वास्तविक समय में नागरिकों के डाटा की विश्वसनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
जनसंख्या-स्तरीय बायोमेट्रिक डुप्लीकेशन हटाना
“एक व्यक्ति, एक पहचान” के सिद्धांत को बनाए रखने के लिए यूआईडीएआई विश्व की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक डुप्लीकेशन प्रणालियों में से एक संचालित करता है। प्रत्येक नए आधार नामांकन का पूरे पंजीकृत आधार डाटाबेस से मिलान किया जाता है ताकि उसकी विशिष्टता सुनिश्चित हो सके।
यूआईडीएआई ने अंतर्राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT, हैदराबाद) के सहयोग से उंगलियों के निशान, चेहरे और आंखों की पुतली सहित सभी बायोमेट्रिक माध्यमों के लिए स्वदेशी उन्नत एआई मॉडल विकसित किए हैं। ये मॉडल NVIDIA के डीजीएक्स उच्च-प्रदर्शन इन्फरेंस इंफ्रास्ट्रक्चर पर संचालित होते हैं, जिससे जनसंख्या-स्तर पर सुरक्षित एवं तीव्र डाटा प्रसंस्करण संभव हो पाता है।
डुप्लीकेशन हटाने की प्रत्येक प्रक्रिया में अरबों गणनाएं शामिल होती हैं। नवीनतम एआई तकनीकों के माध्यम से कई राज्यों में उन्नत डुप्लीकेशन प्रक्रिया पूर्ण की जा चुकी है तथा आगामी महीनों में इसे राष्ट्रव्यापी स्तर पर लागू किया जाएगा।
स्मार्ट दस्तावेज़ सत्यापन: धोखाधड़ी पर प्रारंभिक रोक
नामांकन संबंधी धोखाधड़ी को रोकने के लिए यूआईडीएआई ने एआई-आधारित दस्तावेज़ मेटाडेटा निष्कर्षण एवं प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापन प्रणाली लागू की है। यह प्रणाली DigiLocker के एपीआई का उपयोग कर दस्तावेज़ों का प्रमाणीकरण करती है।
इस उन्नत प्लेटफॉर्म के माध्यम से दस्तावेज़ों की प्रामाणिकता सुनिश्चित होती है, नामांकन एवं अद्यतन प्रक्रिया में लगने वाला समय घटता है तथा आधार संख्या धारकों को प्रदान की जाने वाली सेवाओं की गुणवत्ता में वृद्धि होती है।
एआई-सक्षम इस परिवर्तन के माध्यम से यूआईडीएआई एक सुरक्षित, विश्वसनीय और नागरिक-केंद्रित डिजिटल पहचान तंत्र के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है।



