उत्तर प्रदेशलखनऊ

लखनऊ : सिविल अस्पताल- दुर्व्यवस्था का शिकार

* बाल रोग विभाग में मरीजों संग अब कुत्ते भी कर रहे डॉक्टर का इंतजार

*  अव्यवस्था का शिकार सिविल अस्पताल में लगा गंदगी का अंबार

*  लापरवाही और अव्यवस्था ने सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल

निश्चय टाइम्स, लखनऊ। राजधानी लखनऊ के सबसे पुराने और बड़े सरकारी अस्पतालों में शुमार तथा मुख्यमंत्री आवास से मात्र 500 मीटर दूर स्थित श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल अस्पताल की दुर्व्यवस्था खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। अस्पताल के बाल रोग विभाग (पेडियाट्रिक वार्ड) में एक तरफ जहां गंदगी का अंबार लगा हुआ है वहीं दूसरी तरफ सबसे हैरान करने वाली तस्वीरें यहां आराम फरमाते आवारा कुत्तों की सामने आई हैं। जहां बच्चों और उनके परिजन इलाज के लिए घंटों इंतजार करते हैं, वहीं अस्पताल परिसर में कुत्तों की मौजूदगी ने स्वास्थ्य व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अस्पताल में जगह-जगह गंदगी, टूटी कुर्सियाँ और अव्यवस्थित बेड मरीजों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। इलाज कराने आए परिजनों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन पूरी तरह लापरवाह है। जिन वार्डों में संक्रमण से बचने के लिए साफ-सफाई की सबसे ज्यादा जरूरत है, वहीं बदइंतजामी की हालत सबसे गंभीर है।


स्थानीय लोगों और मरीजों ने आरोप लगाया है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। आवारा कुत्तों का अस्पताल में खुलेआम घूमना और बच्चों को दौड़ा लेना न सिर्फ मरीजों की सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि संक्रमण फैलने की संभावना को भी बढ़ा देता है।


सरकारी स्तर पर अस्पतालों की व्यवस्था सुधारने के कई दावे किए जाते हैं, लेकिन सिविल अस्पताल की यह तस्वीर उन दावों की हकीकत को बयां करती है। राजधानी के इस बड़े अस्पताल का जब यह हाल है, तो दूर-दराज के छोटे शहरों और कस्बों के अस्पतालों की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। जनता का कहना है कि यदि सरकार और स्वास्थ्य विभाग जल्द ही इस ओर ध्यान नहीं देते तो गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आने वाले मरीज खुद अस्पताल की अव्यवस्था और संक्रमण का शिकार हो सकते हैं।

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