MSP खरीद के बड़े दावे, लेकिन जमीनी सच्चाई पर उठे सवाल
लक्ष्य ऊंचे, व्यवस्था पर संदेह—क्या किसानों तक पहुंचेगा पूरा लाभ?

निश्चय टाइम्स न्यूज नेटवर्क
रबी सीजन 2026-27 के लिए दलहन और तिलहन की MSP खरीद 2 अप्रैल से शुरू करने का ऐलान तो हो गया है, लेकिन इस बार भी किसानों के मन में कई सवाल अनुत्तरित हैं। सरकार ने चना, मसूर, सरसों और तूर की खरीद के लिए बड़े लक्ष्य तय किए हैं, पर पिछले वर्षों की समस्याओं को देखते हुए जमीनी हकीकत पर संदेह बना हुआ है।
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने प्रेसवार्ता में दावा किया कि किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए व्यापक रणनीति बनाई गई है। MSP दरें भी घोषित की गई हैं, लेकिन अक्सर देखा गया है कि किसानों को इन दरों पर फसल बेचने के लिए लंबी प्रतीक्षा, सीमित केंद्र और तकनीकी अड़चनों का सामना करना पड़ता है।
प्रदेश में 190 से अधिक क्रय केंद्र स्थापित करने की बात कही गई है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह संख्या प्रदेश के लाखों किसानों के लिए पर्याप्त होगी? खासकर दूर-दराज के इलाकों में किसान अब भी बिचौलियों पर निर्भर रहने को मजबूर रहते हैं, जिससे MSP का लाभ उन्हें पूरी तरह नहीं मिल पाता।
सरकार डिजिटल प्रणाली और DBT के जरिए सीधे भुगतान की बात कर रही है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी खामियां, नेटवर्क की समस्या और आधार लिंकिंग में गड़बड़ी अक्सर किसानों के लिए परेशानी का कारण बनती रही हैं। ऐसे में पारदर्शिता का दावा कितना कारगर होगा, यह देखना बाकी है।
इसके अलावा, उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता और बीज वितरण की बड़ी उपलब्धियों का दावा भी किया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई बार खाद की किल्लत और वितरण में अनियमितता की शिकायतें सामने आती रही हैं।
हालांकि सरकार ने “भारत रत्न चौधरी चरण सिंह सीड पार्क” जैसी योजनाओं को भविष्य की बड़ी पहल बताया है, लेकिन वर्तमान में किसानों की सबसे बड़ी चिंता उनकी फसल का सही दाम और समय पर भुगतान है।
स्पष्ट है कि घोषणाओं और योजनाओं की कमी नहीं है, लेकिन असली परीक्षा उनके प्रभावी क्रियान्वयन की है। अगर जमीनी स्तर पर खामियां दूर नहीं हुईं, तो MSP खरीद का यह अभियान भी कागजों तक सीमित रह सकता है।



