स्पेस स्टार्टअप फंड पर धीमी रफ्तार—₹1005 करोड़ का कोष, निवेश अब भी दूर
तैयारियां पूरी, लेकिन ज़मीनी निवेश में देरी—स्टार्टअप्स को इंतजार, सिस्टम पर सवाल

| निश्चय टाइम्स न्यूज नेटवर्क
भारत के महत्वाकांक्षी स्पेसटेक सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया वेंचर कैपिटल फंड अब भी शुरुआती प्रक्रियाओं में उलझा हुआ नजर आ रहा है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में जानकारी दी कि ₹1,005 करोड़ के इस फंड से वास्तविक निवेश वित्तीय वर्ष 2027 की पहली तिमाही से शुरू होने की उम्मीद है—यानी अभी और इंतजार तय है।
हालांकि SIDBI Venture Capital Limited (SVCL) को फंड का प्रबंधन सौंपा गया है और भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड से पंजीकरण भी मिल चुका है, लेकिन निवेश प्रक्रिया अब तक कागजी औपचारिकताओं और मूल्यांकन चरण में ही अटकी हुई है।
सरकार के अनुसार, कस्टोडियन की नियुक्ति, AIF यूनिट्स का ढांचा और निवेश समितियों का गठन जैसे कदम पूरे हो चुके हैं। बावजूद इसके, स्टार्टअप्स तक पूंजी पहुंचने में देरी यह संकेत देती है कि नीति और क्रियान्वयन के बीच अब भी बड़ा अंतर मौजूद है।
चार प्रस्ताव “उन्नत चरण” में होने के बावजूद फंडिंग शुरू न होना सवाल खड़े करता है कि क्या भारत का स्पेसटेक इकोसिस्टम अभी भी निवेश के लिए तैयार नहीं है, या फिर प्रक्रियाएं जरूरत से ज्यादा जटिल हैं। खुद मंत्री ने स्वीकार किया कि स्टार्टअप्स को दस्तावेज़ीकरण और डेटा तैयार करने में सहायता दी जा रही है—जो इस सेक्टर की अपरिपक्वता को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जहां वैश्विक स्तर पर स्पेस स्टार्टअप्स तेजी से निवेश आकर्षित कर रहे हैं, वहीं भारत में इतनी बड़ी फंडिंग पहल का धीमा क्रियान्वयन अवसरों के नुकसान का कारण बन सकता है।
सरकार ने भले ही इसे भविष्य की बड़ी पहल बताया हो, लेकिन मौजूदा स्थिति यह संकेत देती है कि महत्वाकांक्षा और वास्तविक प्रगति के बीच अब भी लंबा फासला तय करना बाकी है।



