यूरिया वितरण पर निर्भरता और सिस्टम की चुनौतियां—सहकारी नेटवर्क पर बढ़ता दबाव
केंद्र से आवंटन, राज्यों पर जिम्मेदारी—किसानों तक पहुंच में अब भी कई बाधाएं

निश्चय टाइम्स न्यूज नेटवर्क
देश में किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने की व्यवस्था अभी भी कई स्तरों पर चुनौतियों से घिरी हुई है। उर्वरक विभाग द्वारा राज्यों को यूरिया का मासिक आवंटन किया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर वितरण की जिम्मेदारी राज्य सरकारों पर होने के कारण समन्वय की कमी अक्सर सामने आती है।
यूरिया की आपूर्ति में कृभको और इफको जैसी प्रमुख सहकारी संस्थाएं अहम भूमिका निभाती हैं। बावजूद इसके, राज्यों के भीतर वितरण प्रणाली में असमानता और देरी की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं, खासकर लघु और सीमांत किसानों के बीच।
सरकार ने सहकारी नेटवर्क को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें उर्वरक दुकानों को प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र में बदलना शामिल है। देशभर में 38,000 से अधिक पैक्स को इस रूप में विकसित किया गया है, ताकि किसानों को एक ही स्थान पर बीज, उर्वरक, कीटनाशक और सलाहकार सेवाएं मिल सकें।
इसके अलावा, “भारत” ब्रांड के तहत उर्वरकों की एकीकृत आपूर्ति और समेकित उर्वरक निगरानी प्रणाली के जरिए निगरानी की व्यवस्था लागू की गई है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी सुधारों के बावजूद अंतिम स्तर पर वितरण में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करना अब भी एक बड़ी चुनौती है।
राज्यों पर बढ़ती निर्भरता और स्थानीय स्तर पर नीति के भिन्न-भिन्न क्रियान्वयन के कारण कई बार किसानों को जरूरत के समय उर्वरक नहीं मिल पाता, जिससे कृषि उत्पादन प्रभावित होने का खतरा बना रहता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय, निगरानी और जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक यूरिया वितरण प्रणाली पूरी तरह प्रभावी नहीं बन पाएगी।



