यूनानी अस्पताल खाली, आयुर्वेदिक कॉलेज बेघर — सिस्टम की बड़ी नाकामी
करोड़ों की इमारत बेकार, अल्पसंख्यक स्वास्थ्य संस्थानों पर सवाल

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
बरेली में स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी योजनाओं, अल्पसंख्यक संस्थानों की स्थिति और सामाजिक नेतृत्व की गंभीरता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां वर्षों से जर्जर हालत में चल रहे राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज के लिए नई जमीन नहीं मिल सकी, वहीं दूसरी ओर करोड़ों रुपये से तैयार यूनानी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल अब तक पूरी तरह शुरू ही नहीं हो पाया।
स्थिति यह है कि अब जर्जर घोषित किए जा चुके आयुर्वेदिक कॉलेज को अस्थायी रूप से यूनानी मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है। सवाल यह उठ रहा है कि जब प्रदेश का यह महत्वपूर्ण यूनानी संस्थान वर्षों बाद भी अपनी ओपीडी तक शुरू नहीं कर पाया, तो आखिर इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर यह चर्चा तेज हो गई है कि अल्पसंख्यक समाज अपनी शैक्षिक और चिकित्सा संस्थाओं को लेकर केवल भावनात्मक बयानबाजी तक सीमित रहता है, जबकि जमीनी स्तर पर संस्थानों को मजबूत करने की दिशा में गंभीर प्रयास दिखाई नहीं देते।
करीब 85 वर्ष पुरानी इमारत में संचालित एसआरएम राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज को पीडब्ल्यूडी वर्षों पहले ही जर्जर घोषित कर चुका है। भवन की हालत इतनी खराब बताई जा रही है कि आसपास आरा मशीन चलने पर भी दीवारें कांपने लगती हैं। इसके बावजूद 13 वर्षों में नई भूमि का चयन नहीं हो सका।
दूसरी तरफ यूनानी मेडिकल कॉलेज, जिसे आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं और अल्पसंख्यक चिकित्सा शिक्षा के बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया गया था, वहां आज तक नियमित यूनानी ओपीडी शुरू नहीं हो पाई। नतीजा यह हुआ कि अब खाली पड़ी इमारत का उपयोग आयुर्वेदिक कॉलेज के लिए किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते यूनानी अस्पताल को पूरी क्षमता से शुरू किया गया होता तो यह प्रदेश में यूनानी चिकित्सा का बड़ा केंद्र बन सकता था। लेकिन प्रशासनिक सुस्ती, राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी और सामाजिक दबाव के अभाव ने इस परियोजना को अधर में छोड़ दिया।



