उत्तर प्रदेश

नई नीति से छोटे ज्वेलर्स पर संकट, चांदी बाजार में बढ़ सकती है सट्टेबाजी

सिल्वर आयात पर रोक से बाजार में कृत्रिम महंगाई बढ़ने का खतरा

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

केंद्र सरकार द्वारा सिल्वर बार आयात को “Free” से “Restricted” श्रेणी में डालने के फैसले ने बुलियन और ज्वेलरी उद्योग में असमंजस और चिंता बढ़ा दी है। उद्योग जगत का मानना है कि यह फैसला घरेलू बाजार में सप्लाई संकट, कृत्रिम प्रीमियम और जमाखोरी को बढ़ावा दे सकता है।

ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्ड स्मिथ फेडरेशन (AIJGF) ने चेतावनी दी है कि यदि आयात प्रक्रिया जटिल हुई या लाइसेंसिंग में देरी हुई तो छोटे और मध्यम ज्वेलर्स सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकार की नई नीति से बाजार में अनिश्चितता बढ़ सकती है, जिसका फायदा बड़े ट्रेडर्स और सट्टेबाज उठा सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार भारत में चांदी की मांग केवल आभूषण उद्योग तक सीमित नहीं है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर इंडस्ट्री, पूजा सामग्री और निवेश क्षेत्र में भी इसकी भारी मांग रहती है। ऐसे में आयात नियंत्रण से घरेलू उपलब्धता प्रभावित होने पर कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार की तुलना में कृत्रिम रूप से अधिक हो सकती हैं।

AIJGF ने आशंका जताई है कि MCX और फिजिकल मार्केट में असामान्य उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। यदि समय रहते DGFT स्पष्ट गाइडलाइन जारी नहीं करता, तो बाजार में भ्रम और अनावश्यक सट्टेबाजी का माहौल बन सकता है।

फेडरेशन ने यह भी कहा कि सरकार पारदर्शिता और निगरानी के नाम पर ऐसा सिस्टम लागू न करे जिससे वैध व्यापारियों की सप्लाई चेन बाधित हो जाए। छोटे कारोबारियों का कहना है कि पहले ही बढ़ती लागत और बाजार अस्थिरता से जूझ रहे व्यापार पर अब नई नीति अतिरिक्त दबाव डाल सकती है।

फिलहाल उद्योग जगत सरकार से फास्ट-ट्रैक अनुमति प्रक्रिया, स्पष्ट नियम और जमाखोरी रोकने के लिए मजबूत निगरानी की मांग कर रहा है। आने वाले दिनों में यह फैसला घरेलू चांदी बाजार की दिशा तय कर सकता है।

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