पूर्वोत्तर के ग्रामीण बैंकों को ₹560 करोड़ का रिकॉर्ड मुनाफा, एनपीए 10 साल में सबसे कम
अगरतला में बोले डीएफएस सचिव- गांवों तक बढ़ाएं डिजिटल बैंकिंग और वित्तीय समावेशन

– निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में पूर्वोत्तर क्षेत्र के क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) की एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पूर्वोत्तर के सात क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के अध्यक्षों, सार्वजनिक क्षेत्र के प्रायोजक बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों और नाबार्ड (NABARD) के शीर्ष अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य पूर्वोत्तर राज्यों में भारत सरकार और राज्य सरकारों की विभिन्न वित्तीय योजनाओं के कार्यान्वयन और ग्रामीण बैंकों के व्यावसायिक प्रदर्शन की समीक्षा करना था।
ग्रामीण बैंकों के मुनाफे में 34% का शानदार उछाल
समीक्षा बैठक के दौरान सामने आया कि पूर्वोत्तर क्षेत्र के ग्रामीण बैंकों ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में शानदार प्रदर्शन किया है। इन बैंकों ने कुल 560 करोड़ रुपये का अनंतिम समेकित शुद्ध लाभ (Consolidated Net Profit) दर्ज किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 34 प्रतिशत की बेहतरीन वृद्धि को दर्शाता है। इसके अलावा, बैंकों की वित्तीय स्थिति कितनी मजबूत हुई है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनका सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (GNPA) अनुपात घटकर 4.9 प्रतिशत पर आ गया है। यह पिछले एक दशक (10 साल) का सबसे निचला स्तर है।
डिजिटल बैंकिंग और वित्तीय समावेशन पर रहेगा जोर
बैठक में डीएफएस सचिव ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में इन बैंकों की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक उपस्थिति और जनता का अटूट विश्वास ही इन बैंकों की असली ताकत है। हालांकि, उन्होंने भविष्य की चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि आने वाले समय में आरआरबी को अपनी डिजिटल बैंकिंग सुविधाओं को मजबूत करना होगा। उन्होंने प्रायोजक बैंकों (Sponsor Banks) को निर्देश दिया कि वे ग्रामीण बैंकों को तकनीकी सहायता और आईटी संसाधन उपलब्ध कराएं। सचिव ने यह भी कहा कि जिन इलाकों में अभी बैंकिंग सेवाएं नहीं पहुंची हैं, वहां ‘बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट्स’ का नेटवर्क बढ़ाया जाए और नई शाखाएं खोलने के लिए ऋण की व्यवस्था की जाए।
पूर्वोत्तर के 105 जिलों में फैला है नेटवर्क
पूर्वोत्तर के इन 7 ग्रामीण बैंकों ने क्षेत्र में अपना बड़ा नेटवर्क स्थापित किया है। वर्तमान में ये बैंक पूर्वोत्तर के 7 राज्यों के 105 जिलों में 887 से अधिक शाखाओं के साथ काम कर रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि इन कुल शाखाओं में से 92 प्रतिशत से अधिक शाखाएं शुद्ध रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में काम कर रही हैं, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों के लोगों को सीधे बैंकिंग सेवाओं का लाभ मिल पा रहा है।



