क्या खाली हो रहा है विदेशी मुद्रा भंडार? संकट टालने के लिए RBI ने बैंकों के आगे फैलाए हाथ
सख्त लॉक-इन और भारी-भरकम नियम; FCNR (B) डॉलर स्वैप योजना से बैंकों पर बढ़ेगा दबाव

(निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क):
भारतीय अर्थव्यवस्था और बैंकिंग क्षेत्र के मोर्चे पर एक चिंताजनक संकेत सामने आया है। ऐसा लगता है कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार दबाव में है, जिसे बचाने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को आनन-फानन में बैंकों के लिए एक नई एफसीएनआर (बी) डॉलर स्वैप सुविधा लागू करनी पड़ी है। जानकारों का मानना है कि डॉलर की संभावित कमी और रुपये की कमजोरी को रोकने के लिए केंद्रीय बैंक अब विदेशी प्रवासियों (NRIs) के पैसों का सहारा लेने पर मजबूर हो रहा है।
रिज़र्व बैंक के नए आदेश के मुताबिक, बैंकों को न्यूनतम 3 से 5 साल के लिए नई विदेशी मुद्रा जमा (FCNR-B) जुटानी होगी, जिसे वे RBI के पास डॉलर के बदले रुपये में बदल सकेंगे। हालांकि, इस योजना में केंद्रीय बैंक ने बैंकों के सिर पर नियमों का एक नया बोझ मढ़ दिया है। बैंकों को इन सौदों का बेहद कड़ा और अलग से ऑडिट ट्रेल (दस्तावेजी रिकॉर्ड) रखना होगा, जिससे उनका प्रशासनिक काम और खर्च बढ़ेगा।
इस योजना की सबसे बड़ी खामी इसका सख्त ‘लॉक-इन’ और एकतरफा नियम है। जहां एक तरफ ग्राहकों को एक साल बाद समय से पहले पैसा निकालने की छूट मिल सकती है, वहीं दूसरी तरफ बैंकों के लिए RBI के साथ किया गया यह स्वैप सौदा किसी भी सूरत में रद्द नहीं किया जा सकता। यानी पूरा जोखिम और वित्तीय बोझ बैंकों के मत्थे मढ़ दिया गया है।
इसके अलावा, बैंकों को यह सुविधा हफ्ते में सिर्फ एक बार मिलेगी और 30 सितंबर तक जुटाई गई जमा पर ही यह लागू होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक बाजार में मंदी के माहौल के बीच इतने कम समय में बैंकों के लिए लंबी अवधि के महंगे डॉलर जुटाना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा। कुल मिलाकर, यह कदम विदेशी मुद्रा संकट से निपटने का एक अस्थाई और दवाबपूर्ण प्रयास नजर आ रहा है।



