सुस्त रफ्तार पर भड़के मंत्री: 1 ट्रिलियन डॉलर के सपने पर डेलॉयट की लापरवाही का साया
कागजी वादों में उलझा पर्यटन सेक्टर

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का महत्वाकांक्षी संकल्प विभागीय सुस्ती और कंसल्टेंसी एजेंसियों की नाकामी के भंवर में फंसता नजर आ रहा है। लखनऊ के पर्यटन भवन में आयोजित समीक्षा बैठक में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री जयवीर सिंह ने परामर्शदात्री संस्था डेलॉयट (Deloitte) की कार्यशैली पर गहरा असंतोष और नाराजगी व्यक्त की। मंत्री ने साफ कहा कि पिछले दो वर्षों में संस्था का प्रदर्शन पूरी तरह असंतोषजनक रहा है और योजनाएं केवल फाइलों में सिमट कर रह गई हैं।
आंकड़ों के फर्जीवाड़े पर कसता शिकंजा
प्रदेश में पर्यटकों के आगमन के दावों और वास्तविक धरातल के आंकड़ों में बड़ा अंतर सामने आ रहा है। पर्यटकों की तथ्यात्मक गणना के लिए नैमिषारण्य, विंध्याचल और चित्रकूट जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर अब तक नाइट विजन कैमरे तक स्थापित नहीं किए जा सके हैं। मंत्री ने सख्त हिदायत देते हुए 15 नवंबर तक कैमरे लगाने और दिसंबर तक उन्हें हर हाल में चालू करने के निर्देश दिए हैं, ताकि पर्यटकों की संख्या का पारदर्शी और वास्तविक सच सामने आ सके।
निवेश प्रस्तावों और जमीन के सच में बड़ा फासला
हालांकि डेलॉयट ने महिंद्रा हॉलीडेज, इमैजिका वर्ल्ड और आईटीसी होटल्स द्वारा करोड़ों रुपये के निवेश प्रस्तावों की गुलाबी तस्वीर पेश की, लेकिन धरातल पर इन प्रस्तावों का क्रियान्वयन अभी भी अधर में है। मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी ने भी कंसल्टेंसी फर्म को कार्ययोजना की बेहद धीमी गति पर फटकार लगाई और स्पष्ट किया कि बिना गति और सटीक आंकड़ों के 1 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य हासिल करना असंभव होगा।
विपणन और जमीनी बुनियादी ढांचे की विफलता
14 पर्यटन परिपथों (सर्किट्स) और 60 जनपदों का प्रचार-प्रसार केवल बैठकों और रणनीतियों तक सीमित रहा है। जब तक राज्य में रेस्टोरेंटों, ढाबों और होटलों में कमरों की वास्तविक संख्या और सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ नहीं किया जाता, तब तक सिर्फ कागजी आंकड़ों के सहारे वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर बढ़त हासिल करना एक बड़ा सवालिया निशान बना रहेगा।



