
निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
उत्तर प्रदेश की खनिज अर्थव्यवस्था अब पारंपरिक खण्डा, गिट्टी और बोल्डर के दायरे से आगे बढ़कर फॉस्फोराइट, लौह अयस्क और लाइमस्टोन जैसे प्रमुख खनिजों की खोज और संभावित व्यावसायिक उत्पादन की दिशा में बढ़ रही है। भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग की सचिव एवं निदेशक माला श्रीवास्तव के अनुसार वर्ष 2022 से 2026 के बीच राज्य में खनिज अन्वेषण को नई गति मिली है।
चार साल में नई खोज
विभाग, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, एमईसीएल सहित विभिन्न एजेंसियों के प्रयासों से फॉस्फोराइट, लौह अयस्क और चूना पत्थर की खोज के बाद खनन पट्टों के लिए ई-निविदा सह ई-नीलामी के माध्यम से निवेशकों से बोलियां प्राप्त की गईं। विभाग के अनुसार दो फॉस्फोराइट ब्लॉकों के लिए अन्वेषण पूरा होने के बाद खनन पट्टे हेतु आशय पत्र भी जारी किए जा चुके हैं।
उत्पादन का इंतजार
अब पर्यावरणीय स्वीकृति और वन संबंधी अनापत्तियां मिलने के बाद इन खनिजों का उत्पादन शुरू होने की राह खुलेगी। विभाग का कहना है कि इससे राजस्व बढ़ने के साथ उर्वरक, स्टील और सीमेंट जैसे उद्योगों को कच्चे माल का आधार मिल सकता है।
सोना से दुर्लभ तत्व तक
राज्य में लौह अयस्क, ग्लूकोनाइट, दुर्लभ मृदा तत्व और स्वर्ण धातु से जुड़े ब्लॉकों के लिए भी कंपोजिट लाइसेंस हेतु आशय पत्र जारी किए गए हैं। इन क्षेत्रों में जारी अन्वेषण कार्य की निगरानी की जा रही है।
अन्वेषण का विस्तार
खनिज खोज के अभियान में सरकारी एजेंसियों के साथ निजी कंपनियों की भागीदारी भी बढ़ रही है। राज्य भूवैज्ञानिक कार्यकारिणी परिषद की बैठक में वर्ष 2025-26 की प्रगति और 2026-27 की प्रस्तावित परियोजनाओं पर मंथन किया गया।
24 परियोजनाएं मैदान में
विभागीय विवरण के अनुसार ललितपुर, झांसी और सोनभद्र में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की 15 परियोजनाएं, झांसी, महोबा और ललितपुर में भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग की 4 परियोजनाएं, झांसी में एमईसीएल की 2 परियोजनाएं तथा सोनभद्र में परमाणु ऊर्जा विभाग की 3 परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं।
इन अन्वेषणों के सफल परिणाम भविष्य में नए खनिज ब्लॉकों की नीलामी और खनिज आधारित उद्योगों की स्थापना का आधार बन सकते हैं। आधिकारिक केंद्रीय रिकॉर्ड भी उत्तर प्रदेश में फॉस्फोराइट समेत खनिज अन्वेषण की परियोजनाओं का उल्लेख करता है।



