उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश आबकारी विभाग और एसबीआई का ऐतिहासिक समझौता

वित्तीय समावेशन और डिजिटल क्रांति

डिजिटल युग की ओर एक और कदम

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक सुधार और वित्तीय पारदर्शिता की दिशा में एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है। राज्य के आबकारी विभाग ने डिजिटल भुगतान प्रणाली को और अधिक सुदृढ़, पारदर्शी और सहज बनाने के लिए भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण अनुबंध-विलेख का औपचारिक आदान-प्रदान किया है। यह कदम प्रदेश के वित्तीय ढांचे में तकनीकी समावेश और पारदर्शिता का एक नया अध्याय लिख रहा है।

पारदर्शी और त्वरित ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था

यह समझौता आबकारी नीति वर्ष 2026-27 के प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन के अंतर्गत किया गया है। अब इसके माध्यम से आबकारी विभाग के पोर्टल पर भारतीय स्टेट बैंक के ‘ई-पे’ (E-Pay) पेमेंट गेटवे को पूरी तरह से इंटीग्रेट कर दिया गया है। इस तकनीक के जुड़ने से विभाग के फुटकर अनुज्ञापियों (लाइसेंसधारियों) के लिए लेन-देन की प्रक्रिया अभूतपूर्व रूप से सरल और सुरक्षित हो जाएगी।

पूल एकाउंट व्यवस्था: सुरक्षा और गति का समन्वय

इस नई व्यवस्था के तहत, फुटकर अनुज्ञापी एसबीआई के ई-पे पेमेंट गेटवे का चयन करके अपने इण्डेंट के सापेक्ष थोक अनुज्ञापन के लिए अग्रिम भुगतान सीधे पूल एकाउंट में सुरक्षित रूप से कर सकेंगे। जैसे ही थोक अनुज्ञापनों के सापेक्ष इण्डेंट की निकासी पूरी होगी, पूल एकाउंट में जमा धनराशि को तुरंत और पारदर्शी तरीके से संबंधित खातों में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। इससे वित्तीय लेन-देन में किसी भी प्रकार की देरी या असमंजस की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो जाती है।

प्रशासनिक गरिमा और एसबीआई की भागीदारी

इस महत्वपूर्ण अवसर पर आबकारी विभाग की गरिमामयी उपस्थिति में कई शीर्ष अधिकारी शामिल रहे। उत्तर प्रदेश शासन की अपर मुख्य सचिव, आबकारी विभाग, श्रीमती वीना कुमारी, आबकारी आयुक्त श्री आदर्श सिंह, और अपर आबकारी आयुक्त (प्रशासन) श्री नवनीत सेहारा ने इस ऐतिहासिक समझौते को औपचारिक रूप दिया। दूसरी ओर, भारतीय स्टेट बैंक की ओर से लखनऊ सर्किल के चीफ जनरल मैनेजर श्री दीपेश राज, जनरल मैनेजर (NW-1) श्री विमल किशोर, और डिप्टी जनरल मैनेजर (TBU) श्री मुकेश कुमार सहित कई गणमान्य अधिकारी उपस्थित रहे। यह मजबूत गठजोड़ इस बात का प्रमाण है कि सरकारी और वित्तीय संस्थान मिलकर किस प्रकार नागरिकों और व्यवसायियों के लिए सुशासन और सुगमता के नए द्वार खोल रहे हैं।

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