खेती-किसानी

कृषि-औद्योगिक क्रांति: उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण से समृद्धि का नया सूर्योदय

निवेश और रोजगार का नया कीर्तिमान

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र अब केवल कृषि उत्पादों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राज्य की आर्थिक प्रगति और रोजगार सृजन का मुख्य आधार बन चुका है। ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित ‘UPITS-2026’ के दौरान आयोजित नॉलेज सेशन में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की इस अभूतपूर्व प्रगति को रेखांकित किया गया।

PMFME योजना से बदला ग्रामीण परिदृश्य

उप मुख्यमंत्री एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य ने बताया कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) के तहत प्रदेश में लगभग 28,000 इकाइयों की स्थापना और उन्नयन किया गया है। इसमें ₹2,200 करोड़ के भारी-भरकम निवेश के साथ ही करीब 1,50,000 युवाओं के लिए आजीविका के नए द्वार खुले हैं।

औद्योगिक नीति-2023 से मिला प्रोत्साहन

उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के अंतर्गत राज्य सरकार उद्योगों को मजबूत प्रोत्साहन दे रही है। नीति के तहत प्लांट और मशीनरी पर 35% तक की आर्थिक सहायता तथा सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना पर 90% तक की भारी सब्सिडी का प्रावधान है। अब तक स्थापित 580 विशाल इकाइयों में ₹5,17,792 लाख से अधिक का निवेश हुआ है, जिससे 95,000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं।

वैश्विक बाजार से जुड़ा उत्तर प्रदेश

कार्यक्रम के दौरान 16 महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए। अपर मुख्य सचिव श्री बी.एल. मीना और विशेष सचिव श्री राज कमल यादव ने बताया कि ये समझौते राज्य के प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों को वैश्विक बाजार और निर्यात श्रृंखला से जोड़ेंगे, जिससे स्थानीय किसानों और उद्यमियों की आय में ऐतिहासिक वृद्धि होगी।

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