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ऋण वसूली में तेजी लाने को सरकार सख्त, डीआरटी-डीआरएटी में डिजिटल सुधारों का बड़ा ऐलान

ई-फाइलिंग और हाइब्रिड सुनवाई से बदलेगा न्याय तंत्र, लंबित मामलों पर अब तेज प्रहार

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित उच्चस्तरीय संगोष्ठी में वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) ने ऋण वसूली प्रणाली को अधिक प्रभावी और तेज बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदमों की घोषणा की। इस बैठक में डीआरएटी के अध्यक्षों, डीआरटी के पीठासीन अधिकारियों, बैंकों के प्रतिनिधियों और भारतीय बैंक संघ के वरिष्ठ सदस्यों ने भाग लिया।

सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया कि अब लंबित मामलों की धीमी प्रक्रिया को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ई-फाइलिंग को अनिवार्य बनाना, हाइब्रिड सुनवाई व्यवस्था को मजबूत करना और ईडीआरटी 2.0 प्लेटफॉर्म के जरिए न्यायिक प्रक्रिया को डिजिटल रूप से तेज करना इस दिशा में बड़े कदम हैं। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और मामलों का निपटारा पहले की तुलना में कहीं अधिक तेजी से हो सकेगा।

बैठक में यह भी जोर दिया गया कि बैंकों को अपने आंतरिक निगरानी तंत्र को और मजबूत करना होगा, ताकि ऋण वसूली के मामलों को समय पर न्यायाधिकरणों तक पहुंचाया जा सके। उच्च मूल्य वाले मामलों को प्राथमिकता देने और लोक अदालतों के माध्यम से त्वरित समाधान पर भी बल दिया गया।

संगोष्ठी में यह सामने आया कि जिन डीआरटी ने बेहतर प्रदर्शन किया है, उनके मॉडल को पूरे देश में लागू करने की योजना है। साथ ही, अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाकर उनकी कार्यकुशलता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

नई “बैंकनेट” ई-नीलामी प्रणाली के जरिए संपत्तियों की बिक्री को अधिक पारदर्शी और लाभकारी बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति हो रही है। सरकार का लक्ष्य साफ है—एक ऐसा न्यायिक ढांचा तैयार करना जो तेज, पारदर्शी और परिणाम-केंद्रित हो।


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