राजनीति

सपा सांसदों की गिरफ्तारी पर लखनऊ में भारी जनआक्रोश: हजरतगंज में उतरा सपाईयों का सैलाब

पुलिस से तीखी झड़प के बाद सामूहिक गिरफ्तारी

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

नीट (NEET) परीक्षार्थियों के हक में दिल्ली के जंतर-मंतर पर आवाज बुलंद कर रहे समाजवादी पार्टी के सांसदों की बर्बर गिरफ्तारी और केंद्र सरकार के अलोकतांत्रिक रवैये के खिलाफ आज प्रांतीय राजधानी लखनऊ की सड़कों पर जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। सपा सांसद श्रीमती डिंपल यादव के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन के दमन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हजारों सपा कार्यकर्ताओं ने हजरतगंज में ऐतिहासिक धरना देकर व्यवस्था को हिला कर रख दिया।

सिविल अस्पताल से हजरतगंज तक मार्च: तानाशाही के खिलाफ गूंजे नारे सपा के लखनऊ महानगर और जिला इकाई के सभी फ्रंटल संगठनों के पदाधिकारी और हजारों की संख्या में आक्रोशित कार्यकर्ता सिविल अस्पताल के पास इकट्ठा हुए। हाथों में पार्टी के झंडे, बैनर और सरकार विरोधी तख्तियां लिए कार्यकर्ताओं ने दमनकारी नीतियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए हजरतगंज चौराहे की तरफ कूच किया। हजरतगंज चौराहे को पूरी तरह जाम कर सपाईयों ने बीच सड़क पर धरना दिया और भाजपा सरकार के इस अलोकतांत्रिक व तानाशाहीपूर्ण कृत्य की कड़े शब्दों में भर्त्सना की।

पुलिसिया बर्बरता और धक्का-मुक्की: संवैधानिक अधिकारों का खुला हनन शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान यूपी पुलिस का रवैया बेहद अलोकतांत्रिक, आक्रामक और असंवैधानिक रहा। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने भारी जोर-जबरदस्ती की, जिससे कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी धक्का-मुक्की हुई। सपाईयों के जबरदस्त प्रतिरोध को दबाने के लिए पुलिस ने पूर्व कैबिनेट मंत्री व विधायक रविदास मेहरोत्रा, विधायक अरमान खान, महानगर अध्यक्ष फाखिर सिद्दीकी, जिलाध्यक्ष जयसिंह जयंत, महिला नेता जूही सिंह, पूजा शुक्ला, विनीत कुशवाहा और प्रवक्ता फखरूल हसन चांद सहित सैकड़ों नेताओं को जबरन बसों में भरकर ईको गार्डन पार्क भेज दिया।

ईको गार्डन बना विरोध का गढ़: अंत तक जारी रहा दमन के खिलाफ धरना गिरफ्तारी के बाद भी समाजवादियों का हौसला नहीं टूटा और सभी नेताओं व कार्यकर्ताओं ने ईको गार्डन पार्क में ही दोबारा धरना शुरू कर दिया। राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी द्वारा जारी बयान के अनुसार, इस विशाल प्रदर्शन में कामरान बेग, ऊषा सेन, अमरीश पुष्कर, सीएल वर्मा, विजय सिंह, सुशील दीक्षित और अनूप बाजपेयी सहित हजारों संघर्षी कार्यकर्ता शामिल रहे, जिन्होंने यह साफ कर दिया कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ और विपक्ष की आवाज को दबाने की सरकारी कोशिशों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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