लखनऊ

लखनऊ: विधानभवन के सामने आत्मदाह करने पहुंचा पीलीभीत का परिवार, पुलिस ने रोका, पेट्रोल बरामद

लखनऊ, गुरुवार: यूपी विधानभवन के बाहर एक दर्दनाक घटना को अंजाम देने के लिए पीलीभीत से आए एक परिवार ने आत्मदाह करने की कोशिश की, जिसे वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने समय रहते विफल कर दिया। परिवार के पांच सदस्यों को हिरासत में लिया गया और उनके पास से दो लीटर पेट्रोल बरामद किया गया। पीलीभीत पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए परिवार ने यह कदम उठाया।
 परिवार का आरोप: हत्या कर फंदे से लटका दिया गया
हिरासत में लिए गए परिवार के मुखिया, कृष्ण कुमार, ने पूछताछ के दौरान बताया कि उनके बेटे की हत्या कर उसे फंदे से लटका दिया गया था। उन्होंने दावा किया कि जब वे इस मामले की शिकायत करने पीलीभीत के पीसलपुर थाने पहुंचे, तो पुलिस ने उनकी कोई सुनवाई नहीं की। पुलिस की इस कथित लापरवाही से निराश होकर, परिवार ने आत्मदाह जैसा कदम उठाने का फैसला किया।
 आत्मदाह की कोशिश, पुलिस ने रोका
गुरुवार सुबह लगभग 9:30 बजे, कृष्ण कुमार अपनी पत्नी माया देवी, बेटे पंकज और प्रमोद, और बेटी स्वाति के साथ लखनऊ में विधानभवन के सामने आत्मदाह करने पहुंचे थे। विधानभवन के पास तैनात सतर्क पुलिसकर्मियों ने संदिग्ध गतिविधियों के चलते परिवार को रोका और हिरासत में ले लिया। मौके पर तलाशी लेने पर उनके पास से दो लीटर पेट्रोल भी बरामद हुआ।
 पुलिस की कार्रवाई
इंस्पेक्टर हजरतगंज विक्रम सिंह ने बताया कि परिवार को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। उनका कहना है कि परिवार के आरोपों की जांच की जाएगी और उचित कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस मामले की तहकीकात कर रही है, ताकि परिवार की शिकायत और आरोपों की सच्चाई का पता लगाया जा सके।
 पुलिस के प्रति नाराजगी
कृष्ण कुमार ने पुलिस के खिलाफ नाराजगी व्यक्त करते हुए बताया कि उनके बेटे की हत्या के बावजूद पुलिस ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिससे परिवार को यह कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा। आत्मदाह की यह कोशिश यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, जिससे कानून-व्यवस्था के प्रति आम जनता का विश्वास कमजोर होता दिखाई दे रहा है।
इस घटना ने एक बार फिर पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी और संवेदनशीलता पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि समय रहते पुलिस ने परिवार को आत्मदाह से रोक लिया, लेकिन इस घटना ने पीड़ित परिवारों की निराशा और हताशा को उजागर कर दिया है। मामले की गहराई से जांच और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना अब प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।

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