डीपीआईआईटी का दावा- सुधार और एफटीए से लौटेगा निवेश का विश्वास
नेट एफडीआई आधा, निवेशकों के भरोसे पर बड़ा सवाल

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
भारत में विदेशी निवेश की तस्वीर इन दिनों दो अलग-अलग कहानियां बयां कर रही है। एक तरफ सरकार निवेश, औद्योगिक विकास और व्यापार सुधारों के बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ दीर्घकालिक और स्थिर निवेश का पैमाना माने जाने वाले नेट प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Net FDI) में करीब 50 प्रतिशत की गिरावट ने आर्थिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार नेट एफडीआई घटकर लगभग 10.6 बिलियन डॉलर रह गया है। इसके विपरीत विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) 40.6 बिलियन डॉलर तक पहुंचा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि एफपीआई का प्रवाह तेजी से आता-जाता है, जबकि नेट एफडीआई किसी देश में निवेशकों के दीर्घकालिक भरोसे का संकेत माना जाता है।
इन्हीं सवालों के बीच उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) और इन्वेस्ट यूपी ने लखनऊ में उद्योग संगठनों और मीडिया के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। डीपीआईआईटी के संयुक्त सचिव डॉ. जय प्रकाश शिवहरे ने कहा कि केंद्र सरकार कारोबार को आसान बनाने के लिए लगातार सुधार कर रही है। जन विश्वास अधिनियम के तहत कई पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को हटाया गया है, जिससे उद्योगों पर अनुपालन का बोझ कम हुआ है।
डॉ. शिवहरे ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं, पश्चिम एशिया संकट और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक चुनौतियों के बावजूद भारत ने पिछले पांच वर्षों में 9 से अधिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) किए हैं। इन समझौतों के जरिए लगभग 39 देशों के बाजार भारतीय उद्योगों के लिए खुले हैं। सरकार को उम्मीद है कि इससे निर्यात और निवेश दोनों को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब औद्योगिक पार्कों का चयन प्रतिस्पर्धी मॉडल के आधार पर होगा। राज्यों को बेहतर भूमि, बुनियादी ढांचा, बिजली, पानी और निवेशक-अनुकूल वातावरण दिखाना होगा। सरकार का लक्ष्य निवेश योग्य और प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क विकसित करना है।
हालांकि उद्योग जगत के कुछ प्रतिनिधियों ने नीतिगत स्थिरता, मंजूरी प्रक्रियाओं में तेजी और निवेशकों के लिए अधिक पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं 10 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी वाली विदेशी कंपनियों को मिलने वाली कुछ छूटों को लेकर भी चर्चा बनी हुई है।
इन्वेस्ट यूपी के सीईओ विजय किरण आनंद ने कहा कि निवेश मित्र 3.0, डिजिटल मंजूरी प्रणाली और विदेशी निवेशकों के लिए विशेष सहायता तंत्र उत्तर प्रदेश को निवेश का प्रमुख केंद्र बनाने में मदद कर रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सुधारों और एफटीए के सहारे सरकार नेट एफडीआई में आई गिरावट को पलट पाएगी, या निवेशकों का भरोसा वापस जीतने के लिए और बड़े कदम उठाने होंगे।




