“यूनानी सेवा पद्धति में ‘सुपर पावर’ का खेल! मंत्रालय से निदेशालय तक दबदबे की चर्चा”
“रिटायरमेंट के बाद भी ‘सिस्टम’ पर कब्जा? आयुष विभाग में मठाधीशी के आरोपों से मचा हड़कंप”

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
लखनऊ: उत्तर प्रदेश आयुष विभाग की यूनानी सेवा पद्धति इन दिनों गंभीर विवादों और आरोपों के घेरे में है। मोहम्मद इकबाल सिद्दीकी नाम का एक चेहरा विभागीय गलियारों में इस कदर प्रभावशाली बताया जा रहा है कि रिटायरमेंट हो जाने के बावजूद उनका दबदबा कम होने का नाम नहीं ले रहा। विभागीय सूत्रों का दावा है कि मंत्रालय से लेकर निदेशालय तक कई अधिकारी उनके प्रभाव में काम करने को मजबूर दिखाई देते हैं।
आरोप है कि वर्षों से विभाग में “मठाधीशी” का एक ऐसा तंत्र खड़ा हो चुका है, जहां नियम-कानून से ज्यादा प्रभाव और नेटवर्क की ताकत चलती है। विभाग के अंदर यह चर्चा आम है कि सिद्दीकी खुद को आयुष निदेशालय का “रूलर” मानते हैं और खुले तौर पर दावा करते हैं कि जब निदेशक की नियुक्ति में उन्होंने भूमिका निभाई है तो उनका प्रभाव भी बना रहेगा। हालांकि इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार उठ रही चर्चाओं ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक उनके खिलाफ शासन और प्रशासन स्तर पर कई शिकायतें भेजी गईं, लेकिन हर बार मामला दबा दिया गया। आलोचकों का कहना है कि कार्रवाई तो दूर, कभी औपचारिक नोटिस तक जारी नहीं किया गया। इससे विभाग में यह संदेश गया कि प्रभावशाली लोगों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई लगभग असंभव हो चुकी है।
सरकार जहां “जीरो टॉलरेंस” की नीति का प्रचार करती है, वहीं आयुष विभाग में उठ रहे ये आरोप उस नीति की विश्वसनीयता पर चोट करते दिखाई दे रहे हैं। विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि यदि शिकायतों के बावजूद जांच आगे नहीं बढ़ती, तो इससे भ्रष्टाचार और संरक्षणवाद को बढ़ावा मिलता है।
अब मांग उठ रही है कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आखिर विभाग में किसके इशारे पर प्रशासनिक फैसले प्रभावित हो रहे हैं।



