उत्तर प्रदेश

जीरो टॉलरेंस की धज्जियां! परिवहन आयुक्त कार्यालय में ‘तारीख पर तारीख’ से सवालों के घेरे में जांच प्रक्रिया”

“कंपनी को बचाने और कर्मचारियों को फंसाने का खेल? स्मार्ट कार्ड घोटाले की जांच पर उठे गंभीर सवाल”

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जहां भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति का दावा करती है, वहीं परिवहन आयुक्त कार्यालय की कार्यशैली इन दावों की साख पर सवाल खड़े करती दिखाई दे रही है। स्मार्ट कार्ड ड्राइविंग लाइसेंस परियोजना में कथित नियुक्ति घोटाले और धन उगाही के मामले की जांच लगातार टलने से पीड़ित पक्ष में भारी नाराजगी है। आरोप है कि अधिकारियों द्वारा बार-बार तारीख बढ़ाकर असली दोषियों को बचाने और बेगुनाह कर्मचारियों को मानसिक प्रताड़ना देने का प्रयास किया जा रहा है।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि रोज मार्ट टेक्नोलॉजी प्रा. लि. से जुड़े मामले में अब तक दो बार सुनवाई टाली जा चुकी है। पहले 8 मई की सुनवाई “अपरिहार्य कारणों” का हवाला देकर अधूरी छोड़ दी गई और अब 18 मई की नई तारीख देकर फिर जांच लटका दी गई। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर जांच को निष्पक्ष तरीके से पूरा करने में इतनी देरी क्यों हो रही है।

पीड़ित पक्ष का आरोप है कि परिवहन विभाग के कुछ अधिकारी जांच को जानबूझकर लंबा खींच रहे हैं ताकि कंपनी को क्लीन चिट दी जा सके। वहीं दूसरी ओर जिन लोगों ने शिकायत की या गवाही दी, उन्हें बार-बार बुलाकर दबाव बनाने और थकाने की कोशिश की जा रही है। इससे पूरे मामले की पारदर्शिता पर गंभीर संदेह पैदा हो गया है।

जानकारों का कहना है कि यदि सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति वास्तव में लागू होती, तो इस तरह की जांच समयबद्ध तरीके से पूरी होती और दोषियों पर कार्रवाई होती। लेकिन मौजूदा हालात यह संदेश दे रहे हैं कि विभागीय स्तर पर अब भी प्रभावशाली कंपनियों को संरक्षण देने की प्रवृत्ति खत्म नहीं हुई है।

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आगामी सुनवाई में सच सामने आएगा या फिर एक और नई तारीख देकर मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश होगी।

Related Articles

Back to top button