इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला की एस्ट्रोफोटोग्राफी तकनीक का प्रशिक्षण
17 प्रतिभागियों तक सीमित रही कार्यशाला, आधुनिक खगोलीय इमेजिंग सीखने का अवसर मिला लेकिन इसका दायरा और बढ़ाने की जरूरत
निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
खगोल विज्ञान को आम युवाओं और विद्यार्थियों तक पहुंचाने की बात भले ही तेजी से हो रही हो, लेकिन अत्याधुनिक तकनीकों की वास्तविक पहुंच अभी भी सीमित दिखाई देती है। इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला, लखनऊ में आयोजित बेसिक एस्ट्रोफोटोग्राफी कार्यशाला ने प्रतिभागियों को आधुनिक खगोलीय फोटोग्राफी की बारीकियां जरूर सिखाईं, लेकिन महज 17 प्रतिभागियों तक सीमित यह पहल यह सवाल भी छोड़ गई कि ऐसी उपयोगी तकनीकी शिक्षा का दायरा आखिर कब व्यापक होगा।
लखनऊ विश्वविद्यालय के खगोलिकी विभाग के सहयोग से आयोजित कार्यशाला में प्रतिभागियों को दूरबीनों की संरचना, टेलीस्कोप माउंटिंग और हैंडलिंग, DSLR कैमरा सेटअप तथा ISO, Aperture, Exposure Time और Focus Adjustment जैसी तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। Sky-Watcher EQ Mount और T-Ring Adapter के इस्तेमाल का भी व्यावहारिक अभ्यास कराया गया।
डीप-स्काई से ग्रहों की तस्वीर तक तकनीकी प्रशिक्षण
कार्यशाला में Deep-Sky और Planetary Astrophotography पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। प्रतिभागियों ने Light, Dark, Flat और Bias Frames के माध्यम से इमेज स्टैकिंग की प्रक्रिया सीखी। Astro Photography Tools, DeepSkyStacker, AutoStakkert, PIPP और RegiStax जैसे सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल का प्रशिक्षण भी दिया गया।
Jupiter, Saturn और Moon की तस्वीरें बेहतर तरीके से लेने के लिए High Frame Rate Capture तथा इमेज प्रोसेसिंग तकनीकों का प्रदर्शन किया गया। Adobe Photoshop, PixInsight और GIMP के माध्यम से Colour Balancing, Background Gradient Removal, Noise Reduction और Contrast Enhancement जैसी प्रक्रियाएं भी समझाई गईं।
हाथों से सीखने का दावा, अंतिम तस्वीर तक पहुंचा प्रशिक्षण
कार्यशाला की खासियत यह रही कि प्रतिभागियों को केवल व्याख्यान सुनने तक सीमित नहीं रखा गया। उन्हें स्वयं फोटोग्राफी, इमेज प्रोसेसिंग और अंतिम आउटपुट तैयार करने का अवसर दिया गया। प्रतिभागियों ने अपनी खींची खगोलीय तस्वीरों पर काम करते हुए Final Processed Astronomical Image तैयार की।
कार्यशाला के समापन पर प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम के कुछ सत्र खगोल प्रयोगशाला, लखनऊ विश्वविद्यालय में और कुछ इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला में आयोजित हुए।
विशेषज्ञों और UPAAC का सहयोग
कार्यक्रम में प्रो. अलका मिश्रा तथा उत्तर प्रदेश एमेच्योर एस्ट्रोनॉमर्स क्लब के सदस्यों दीपशिखा, अनमोल शुक्ला और आयुष सक्सेना ने सहयोग दिया। डॉ. सुमित कुमार श्रीवास्तव, डॉ. उपशम गोयल, सौरभ मिश्रा, उत्कर्ष मिश्रा, होजैफा शकील, अनुराग अवस्थी, संकल्प मोहन और शंकर दयाल पाठक ने विभिन्न सत्र लिए।
कार्यशाला इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला, परिषद विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, उत्तर प्रदेश तथा UPAAC के सहयोग से आयोजित की गई। पहल उपयोगी रही, लेकिन भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों में अधिक विद्यार्थियों और खगोल विज्ञान के नए उत्साही युवाओं को जोड़ना ही इसकी वास्तविक सफलता का पैमाना होगा।



