अंतरराष्ट्रीय

भारत-जापान के बीच 75 अरब डॉलर का करेंसी स्वैप समझौता नवीनीकृत

वित्तीय सहयोग को नई मजबूती: भारत और जापान ने बढ़ाया द्विपक्षीय स्वैप करार

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क | डी एफ हिंदी

भारत और जापान के बीच वित्तीय सहयोग को नई मजबूती देते हुए दोनों देशों ने द्विपक्षीय करेंसी स्वैप व्यवस्था (Bilateral Swap Arrangement – BSA) को नवीनीकृत कर दिया है। यह समझौता 28 फरवरी 2026 से प्रभावी हो गया है। इस व्यवस्था के तहत दोनों देशों के केंद्रीय बैंक आवश्यकता पड़ने पर अपनी स्थानीय मुद्राओं को अमेरिकी डॉलर के बदले आपस में स्वैप कर सकते हैं।

इस समझौते पर जापान के वित्त मंत्रालय की ओर से एजेंट के रूप में बैंक ऑफ जापान और भारत की ओर से भारतीय रिज़र्व बैंक ने तीसरे संशोधन एवं पुनर्स्थापन समझौते (Third Amendment and Restatement Agreement) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते का कुल आकार पहले की तरह 75 अरब अमेरिकी डॉलर ही रखा गया है।

द्विपक्षीय स्वैप व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच वित्तीय स्थिरता को मजबूत करना और आपातकालीन परिस्थितियों में तरलता (Liquidity) की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार यह व्यवस्था वैश्विक वित्तीय अस्थिरता के दौर में एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है।

यह व्यवस्था तब विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाती है जब वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ती है या विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है। ऐसे समय में यह स्वैप व्यवस्था दोनों देशों को त्वरित वित्तीय सहायता प्राप्त करने का विकल्प प्रदान करती है, जिससे मुद्रा बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलती है।

भारत और जापान के बीच आर्थिक और रणनीतिक संबंध लगातार मजबूत होते जा रहे हैं। दोनों देश एशिया-प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ वैश्विक वित्तीय प्रणाली में स्थिरता बनाए रखने के लिए भी मिलकर काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच विश्वास और रणनीतिक साझेदारी का भी प्रतीक है।

इस स्वैप व्यवस्था को क्षेत्रीय और वैश्विक वित्तीय सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। भारत और जापान दोनों का मानना है कि इस व्यवस्था से न केवल द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूती मिलेगी बल्कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में वित्तीय स्थिरता को भी बढ़ावा मिलेगा।

वैश्विक अर्थव्यवस्था में लगातार बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच भारत और जापान का यह कदम आर्थिक सहयोग के नए आयाम स्थापित करने वाला माना जा रहा है।


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