उत्तर प्रदेश

एसएलबीसी बैठक में दावे बड़े, जमीनी हकीकत पर सवाल

योजनाओं की प्रगति पर समीक्षा, लेकिन चुनौतियां बरकरार

निश्चय टाइम्स न्यूज नेटवर्क (DF हिंदी)।
राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी), उत्तर प्रदेश की दिसम्बर 2025 तिमाही की समीक्षा बैठक भले ही बड़े दावों और योजनाओं की उपलब्धियों के साथ संपन्न हुई, लेकिन जमीनी स्तर पर बैंकिंग सेवाओं की स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। बैठक की अध्यक्षता मुख्य सचिव एस.पी. गोयल और सह-अध्यक्षता Bank of Baroda के कार्यपालक निदेशक लाल सिंह ने की।

बैठक में Reserve Bank of India, वित्त मंत्रालय, नाबार्ड, SIDBI सहित कई संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में बैंकों का कुल व्यवसाय ₹32.79 लाख करोड़ तक पहुंच चुका है और CD Ratio 60.39% बताया गया, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंकड़े वास्तविक वित्तीय समावेशन को पूरी तरह नहीं दर्शाते।

बैठक के दौरान MSME, कृषि और स्वरोजगार योजनाओं में ऋण प्रवाह बढ़ाने की बात दोहराई गई, लेकिन हकीकत यह है कि छोटे उद्यमियों और किसानों को अब भी समय पर ऋण नहीं मिल पा रहा है। “क्रेडिट प्लस अप्रोच” जैसे शब्द भले ही आकर्षक लगते हों, लेकिन इनके प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल बने हुए हैं।

मुख्य सचिव ने ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं के विस्तार की जरूरत पर जोर दिया, जो खुद इस बात का संकेत है कि अभी भी इन क्षेत्रों में बैंकिंग पहुंच पर्याप्त नहीं है। CM YUVA, ODOP और PM SVANidhi जैसी योजनाओं का जिक्र जरूर हुआ, लेकिन इन योजनाओं के लाभार्थियों तक पहुंच और क्रियान्वयन की गति पर संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका।

बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों और जमीनी सच्चाई के बीच का अंतर एक बार फिर उजागर हुआ। वित्तीय समावेशन और आर्थिक विकास के दावों के बीच, आम नागरिकों और छोटे उद्यमियों की समस्याएं अब भी जस की तस बनी हुई हैं।

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