उत्तर प्रदेश

निर्माणाधीन सेतु में बड़ा हादसा, सुरक्षा इंतजामों की खुली पोल

लापरवाही की कीमत, ठेकेदार पर FIR और इंजीनियर निलंबित

सिस्टम पर सवाल, जांच कमेटी से सच सामने आने का इंतजार

निश्चय टाइम्स न्यूज नेटवर्क (DF हिंदी)

चंदौली में निर्माणाधीन रेल उपरिगामी सेतु पर हुआ हादसा एक बार फिर सरकारी परियोजनाओं में लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को उजागर करता है। डीएफसीसी रूट के मुगलसराय–गया रेल सेक्शन पर बन रहे इस सेतु का स्लैब कंक्रीटिंग के दौरान आंशिक रूप से गिर गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया, लेकिन कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

घटना 18 मार्च 2026 की रात करीब 11 बजे हुई, जब कंक्रीटिंग के दौरान हाइड्रा मशीन का बूम स्टेजिंग से टकरा गया। इसके चलते निर्माणाधीन स्लैब का एक हिस्सा ढह गया। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन यह “किस्मत का साथ” ज्यादा और “प्रबंधन की सफलता” कम नजर आती है।

इस परियोजना का कार्य श्रेष्ठाभिषेक बिल्डकॉन प्रा० लि० द्वारा किया जा रहा था। प्रथम दृष्टया लापरवाही सामने आने पर ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई है। इसके साथ ही अवर अभियंता को तत्काल निलंबित कर दिया गया है, जबकि सहायक अभियंता और परियोजना प्रबंधक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

हालांकि कार्रवाई के ये कदम सवालों से बचने के लिए पर्याप्त नहीं माने जा रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं केवल व्यक्तिगत लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की खामियों की ओर इशारा करती हैं, जहां निगरानी और सुरक्षा मानकों का पालन अक्सर कागजों तक सीमित रह जाता है।

घटना की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम ने संयुक्त प्रबंध निदेशक की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय तकनीकी समिति का गठन किया है, जिसे तीन दिनों में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह जांच वास्तविक दोषियों तक पहुंचेगी या फिर जिम्मेदारी तय करने के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जाएगी?

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