पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार अलर्ट, ऊर्जा और आपूर्ति पर कड़ी निगरानी
अफवाहों से बढ़ी अफरा-तफरी, जमाखोरी पर सख्ती के निर्देश

4.5 लाख भारतीयों की वापसी, लेकिन हालात अब भी चुनौतीपूर्ण
निश्चय टाइम्स न्यूज नेटवर्क | डीएफ हिंदी:
पश्चिम एशिया में जारी तनावपूर्ण हालात के बीच भारत सरकार ने ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री सुरक्षा और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर व्यापक रणनीति लागू की है। सरकार का दावा है कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है, लेकिन जमीनी स्तर पर अफवाहों के चलते कई जगहों पर घबराहट में खरीदारी और भीड़ देखने को मिली है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं के कारण आपूर्ति पर दबाव की आशंका के बीच सरकार ने रिफाइनरियों को पूर्ण क्षमता पर संचालित करने और घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही प्रवासी श्रमिकों और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त एलपीजी आवंटित किया गया है। केवल एक दिन में 37,000 से अधिक छोटे सिलेंडर की बिक्री इस दबाव का संकेत है।
सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। देशभर में 2600 से अधिक छापेमारी और 680 से अधिक एफआईआर दर्ज होना इस दिशा में कार्रवाई की गंभीरता को दर्शाता है। इसके बावजूद सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह कदम पर्याप्त हैं या हालात और बिगड़ सकते हैं।
समुद्री क्षेत्र में भी सरकार ने निगरानी बढ़ा दी है। पश्चिमी फारस की खाड़ी में भारतीय जहाजों और 540 नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कंट्रोल रूम 24×7 सक्रिय है। अब तक 674 से अधिक नाविकों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है।
हवाई संचालन में सुधार के बावजूद कई क्षेत्रों में उड़ानें बाधित हैं, जिससे यात्रा प्रभावित हो रही है। 28 फरवरी से अब तक लगभग 4.5 लाख भारतीयों की वापसी कराई गई है, लेकिन संकट की स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं मानी जा रही।
सरकार लगातार नागरिकों से अपील कर रही है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें। साथ ही ऊर्जा संरक्षण और वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा



