लखनऊ

बैंक पेंशनर्स में बढ़ता असंतोष, संशोधित पेंशन और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सरकार पर सवाल

“सेवानिवृत्त अधिकारी आर्थिक संकट में”, बैंक पेंशनर्स संगठन ने उठाई लंबित मांगों की आवाज

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

ऑल इंडिया इंडियन बैंक पेंशनर्स एंड रिटायरीज एसोसिएशन (AIIBPARA) उत्तर प्रदेश (मध्य) लखनऊ इकाई ने अपने चतुर्थ त्रिवार्षिक अधिवेशन की पूर्व संध्या पर आयोजित प्रेस वार्ता में बैंक पेंशनर्स और रिटायरीज की समस्याओं को लेकर सरकार और इंडियन बैंक एसोसिएशन (IBA) पर गंभीर सवाल खड़े किए। संगठन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि वर्षों से लंबित मांगों की लगातार अनदेखी की जा रही है, जिससे हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारी आर्थिक और मानसिक संकट का सामना कर रहे हैं।

संगठन के अध्यक्ष एन. एन. दुबे और प्रांतीय सचिव हरिहर प्रसाद सिंह ने कहा कि वर्ष 1995 से लागू पेंशन योजना में समय-समय पर हुए द्विपक्षीय वेतन समझौतों के अनुरूप पेंशन पुनर्निर्धारण और अपडेशन किया जाना था, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि स्थिति इतनी विषम हो चुकी है कि आज एक हालिया सेवानिवृत्त चपरासी की पेंशन, 15 वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त जनरल मैनेजर से अधिक हो गई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि बैंकों के पास पेंशन फंड के लिए पर्याप्त सुरक्षित धन और उससे अर्जित ब्याज उपलब्ध होने के बावजूद संशोधित पेंशन भुगतान में जानबूझकर देरी की जा रही है। संगठन के मुताबिक इस असमानता के कारण पुराने पेंशनर्स को महंगाई और बढ़ते चिकित्सा खर्चों के बीच बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन करना पड़ रहा है।

प्रेस वार्ता में स्वास्थ्य बीमा की बढ़ती लागत को भी बड़ा मुद्दा बताया गया। संगठन का कहना है कि हाल के वर्षों में चिकित्सा बीमा प्रीमियम में भारी बढ़ोतरी हुई है, जबकि अस्पताल में भर्ती होने पर कई जरूरी दवाओं और उपचारों का खर्च बीमा सीमा में शामिल नहीं होता। इससे बुजुर्ग पेंशनर्स पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

इंडियन बैंक के पेंशनर्स को मिलने वाले 4000 रुपये वार्षिक चिकित्सा अनुदान को भी बेहद अपर्याप्त बताया गया। संगठन ने मांग की कि इसे वर्तमान चिकित्सा महंगाई और कार्यरत कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं के अनुरूप बढ़ाया जाए।

इसके अलावा संगठन ने महंगाई भत्ते की विसंगतियां दूर करने, स्वास्थ्य बीमा पर जीएसटी हटाने, समूह बीमा योजना लागू करने तथा पेंशनर्स की शिकायतों के समाधान के लिए अलग “रेड्रेसल फोरम” बनाने की मांग उठाई।

10 मई 2026 को आयोजित होने वाले त्रिवार्षिक अधिवेशन में लखनऊ और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में पेंशनर्स, जनप्रतिनिधि और बैंक ग्राहक शामिल होंगे। संगठन ने संकेत दिए कि यदि मांगों का जल्द समाधान नहीं हुआ तो व्यापक आंदोलन की रणनीति पर भी विचार किया जा सकता है।

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