
दस महीने की तनातनी पर लीपापोती! ईसीआई की सर्वसम्मति के दावों की खुली पोल
निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। 10 महीनों तक चले आंतरिक मतभेदों, असहमति के नोटों और तकनीकी कमियों पर पर्दा डालने के लिए आयोग ने एक सफाई बयान जारी किया है। आयोग का कहना है कि विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) सहित उसके सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। हालांकि, जिस तरह से आंतरिक जांच और आयुक्तों के सवाल सामने आए हैं, उससे आयोग के कामकाज की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, पिछले दस महीनों के दौरान आयोग के भीतर प्रशासनिक प्रक्रियाओं और चुनावी सुधारों को लेकर भारी खींचतान देखने को मिली। जब आंतरिक नोट और गंभीर आपत्तियां सार्वजनिक होने लगीं, तो आयोग ने इसे ‘मानक प्रक्रिया’ और ‘सामान्य विचार-विमर्श’ बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की। आयोग का दावा है कि उसने बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में सफल चुनाव कराए और 40 नई पहलें शुरू कीं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि यदि निर्णय वाकई सर्वसम्मत थे, तो महत्वपूर्ण अवसरों पर internal observations और आपत्तियों को दरकिनार क्यों किया गया?
इसके अलावा, ECINET जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और डेटा सुरक्षा को लेकर भी आयोग को सफाई देनी पड़ी है। ERO और DEO स्तर पर मतदाता सूची से नाम जोड़ने और हटाने (पंजीकरण व विलोपन) की वैधानिक शक्तियों के इस्तेमाल पर भी सवाल उठ रहे हैं। महज ‘पारदर्शिता और परिचालन कठोरता’ का हवाला देकर आयोग अपनी अंदरूनी प्रशासनिक खामियों और आयुक्तों के बीच की दरार को छिपा नहीं सकता। लोकतंत्र की रीढ़ कहे जाने वाले इस संवैधानिक निकाय में पारदर्शिता के बजाय कागजी औपचारिकताओं का सहारा लिया जा रहा है।



