श्री अग्रवाल सभा मध्य क्षेत्र में घमासान, बिना बायलॉज चल रही संस्था
चंदा देने पर अपमान का आरोप

श्री अग्रवाल सभा मध्य क्षेत्र में घमासान, बिना बायलॉज चल रही संस्था; चंदा देने पर अपमान का आरोप
राजधानी के मध्य क्षेत्र स्थित प्रतिष्ठित श्री अग्रवाल सभा मध्य क्षेत्र लखनऊ गंभीर विवादों के घेरे में आ गई है। संस्था के पदाधिकारियों द्वारा नियमों को ताक पर रखकर कामकाज चलाने और समाज के लोगों के साथ अपमानजनक व्यवहार करने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। वरिष्ठ महामंत्री अमित अग्रवाल समेत कई पदाधिकारियों ने सभा के मौजूदा संचालन पर बड़ा सवालिया निशान उठाया है।
**प्रमुख आरोप और खुलासे: बायलॉज की धज्जियां:
नियमों के मुताबिक संस्था में साल में चार बैठकें और एक एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) होना अनिवार्य है, जिसमें सभी प्रकार के लेन-देन का हिसाब सार्वजनिक किया जाना चाहिए। आरोप है कि इनमें से किसी भी नियम का पालन नहीं किया जा रहा है।
समाप्त हो चुका है पंजीकरण:
संस्था का ऑफिशियल रजिस्ट्रेशन (पंजीकरण) इसी साल फरवरी में ही समाप्त हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद अब तक इसका नवीनीकरण (Renewal) नहीं कराया गया है, जो कि पूरी तरह से अवैध है।
चंदा देने पर अपमान का घिनौना कृत्य:
सबसे शर्मनाक और दुखद पहलू यह है कि जब समाज का कोई साधारण व्यक्ति अपनी श्रद्धा से 251 या 500 रुपये का चंदा देता है, तो अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष द्वारा उस पैसे को ठुकराकर अपमानित किया जाता है। यह समाज के लोगों के स्वाभिमान पर सीधा प्रहार है।
समाजीकरण के बजाय विघटन:
इस तरह के तानाशाही रवैये से समाज के भीतर निराशा, कुंठा और आक्रोश का माहौल है। यह कृत्य समाज को जोड़ने के बजाय तोड़ने और विघटन की ओर धकेल रहा है।
“मीडिया के माध्यम से जब इन तमाम अनियमितताओं और समाज के अपमान की सूचना मिली, तो दिल को बहुत तकलीफ और दर्द हुआ। इस तरह की तानाशाही कार्यप्रणाली सामाजिक संस्थाओं में दीमक की तरह हैं, जिससे लोगों में कुंठा और निराशा पैदा हो रही है।”
— अमित अग्रवाल, वरिष्ठ महामंत्री जिम्मेदार कौन?
इस पूरे मामले की जद में अध्यक्ष/चैयरमैन रमेश अग्रवाल, अध्यक्ष विनोद अग्रवाल, संरक्षक सीताराम अग्रवाल, मंत्री मनीष अग्रवाल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। समाज के प्रबुद्ध वर्ग का कहना है कि यदि जल्द ही इन मनमाने तौर-तरीकों पर रोक नहीं लगाई गई और हिसाब-किताब पारदर्शी नहीं किया गया, तो समाज सड़क पर उतरकर कड़ा विरोध दर्ज कराएगा।
“नाम बड़े, दर्शन छोटे” — उठे सवाल
कमेटी से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों—लोकराम अग्रवाल, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, पांडेयगंज के सीताराम अग्रवाल और बनवारी लाल कंछल—की भूमिका और संस्था के स्तर पर इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया भी अब महत्वपूर्ण हो गई है।


