बसपा प्रमुख का सपा पर तीखा हमला

मायावती ने परिवारवाद, पूंजी के प्रभाव और ‘पीडीए’ की राजनीति पर उठाए गंभीर सवाल
निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि चुनावी राजनीति में सपा का घोषित सामाजिक न्याय और ‘पीडीए’ का दावा उसके राजनीतिक आचरण से मेल नहीं खाता। उन्होंने कहा कि बसपा की राजनीति परिवारवाद और धनबल से अलग है, जबकि सपा पर उन्होंने इसके विपरीत आचरण करने का आरोप लगाया।
परिवारवाद पर वार
मायावती ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि बसपा चुनावों में अपने परिवार, सगे-संबंधियों या बड़े पूंजीपतियों के बजाय पार्टी के कार्यकर्ता और समाज के गरीब, मध्यम वर्ग तथा कमजोर तबकों के लोगों को उम्मीदवार बनाने पर जोर देती है। इसके विपरीत उन्होंने सपा पर परिवार और करीबी रिश्तेदारों को राजनीतिक अवसर देने का आरोप लगाया।
राज्यसभा चुनाव बना मुद्दा
बसपा प्रमुख ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव में सपा द्वारा रामगोपाल यादव को फिर उम्मीदवार बनाए जाने का उल्लेख करते हुए सपा की नीयत पर सवाल उठाए। उन्होंने धनराज परमल नाथवानी को भी सपा के दूसरे उम्मीदवार के रूप में संदर्भित करते हुए कहा कि इससे सपा की कथित ‘पीडीए’ राजनीति और वास्तविक चुनावी रणनीति के बीच अंतर सामने आता है।
‘पीडीए’ पर सीधा सवाल
मायावती ने कहा कि यदि समाजवादी पार्टी स्वयं को ‘पीडीए’ यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक हितों की राजनीति करने वाली पार्टी बताती है, तो जनता को उसके उम्मीदवार चयन और राजनीतिक फैसलों को भी उसी कसौटी पर परखना चाहिए। उन्होंने मतदाताओं को कथित राजनीतिक नारों और वास्तविक प्रतिनिधित्व के बीच अंतर समझने की अपील की।
दलित-पिछड़े समाज को संदेश
बसपा प्रमुख ने विशेष रूप से दलितों, आदिवासियों, अति-पिछड़ों, मुस्लिमों तथा अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों से आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सतर्क रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इन वर्गों का हित उनकी पार्टी की ‘अम्बेडकरवादी’ विचारधारा में सुरक्षित है।
सियासी तापमान बढ़ा
मायावती के इस बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनावी विमर्श को और धार दे दी है। उनका हमला ऐसे समय सामने आया है जब विभिन्न दल सामाजिक समीकरणों, प्रतिनिधित्व और गठबंधन की राजनीति को लेकर अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटे हैं। हालांकि, पोस्ट में लगाए गए आरोपों पर सपा की प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं है।



