अक्षुण्ण विरासत: साहित्य और खेल का ऐतिहासिक संगम
लखनऊ जीपीओ में फिलेटली दिवस पर विशेष आवरण व विरूपण का विमोचन

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क,
राष्ट्रीय डाक सप्ताह के पावन और गरिमामयी अवसर पर आज लखनऊ के ऐतिहासिक प्रधान डाकघर (जी.पी.ओ.) में भारतीय संस्कृति, साहित्य और खेल जगत की उपलब्धियों को चिरस्थायी बनाने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं गौरवशाली अध्याय जुड़ गया। राष्ट्रीय डाक सप्ताह के अंतर्गत आज आयोजित ‘फिलेटली दिवस’ के विशिष्ट समारोह में पद्मश्री एवं पद्मभूषण से विभूषित अमर साहित्यकार राष्ट्रकवि डॉ. शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ की अप्रतिम स्मृति को समर्पित तथा स्वर्ण पदक विजेता भारतीय पुरुष एवं महिला हॉकी टीम के स्वर्णिम यश को सम्मानित करते हुए विशेष आवरण एवं विशेष विरूपण (Special Cover and Special Cancellation) का भव्य विमोचन किया गया। यह आयोजन मात्र डाक विभाग का कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्र के दो गौरवशाली स्तंभों—साहित्य की चेतना और खेल के पराक्रम—को समर्पित एक राष्ट्र-वंदना बन गया।
गरिमामयी उपस्थिति और स्मृतियों का झरोखा
इस गरिमामयी समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश परिमंडल के चीफ पोस्टमास्टर जनरल श्री अजय सिंह चौहान ने अपनी ओजस्वी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि के रूप में मुख्यालय परिक्षेत्र, लखनऊ के पोस्टमास्टर जनरल श्री सुनील कुमार राय ने शिरकत की, जबकि स्वर्गीय डॉ. शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ के भ्रातृ-पुत्र श्री मोहन सिंह इस ऐतिहासिक क्षण के विशेष आमंत्रित अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इन प्रतिष्ठित महानुभावों की उपस्थिति ने इस आयोजन को साहित्यिक और सांस्कृतिक दिव्यता प्रदान की।
साहित्य की गहराई और खेल का गगनभेदी उत्कर्ष
समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने डॉ. शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ के महान साहित्यिक योगदान और भारतीय हॉकी टीम के ऐतिहासिक स्वर्ण विजय अभियानों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। वक्ताओं का मानना था कि डॉ. सुमन की कविताएं अन्याय के विरुद्ध संघर्ष और मानवीय संवेदनाओं की जीवंत प्रतीक हैं, जबकि भारतीय हॉकी टीम ने अपनी अटूट मेहनत से देश का मस्तक विश्व पटल पर ऊंचा किया है।
युवा पीढ़ी में फिलेटली (डाक टिकट संग्रह) का आकर्षण
इस अवसर पर यह विशेष रूप से रेखांकित किया गया कि इस प्रकार के विशेष आवरण और विरूपण केवल डाक-संग्रह की वस्तुएं नहीं हैं, बल्कि यह देश की अमूल्य साहित्यिक विरासत और खेल उपलब्धियों के जीवंत दस्तावेज हैं। डिजिटल युग के इस दौर में, फिलेटली (डाक टिकट संग्रह) जैसी विधाओं के माध्यम से देश के युवाओं में अपनी संस्कृति, इतिहास और खेल के प्रति गहरी रुचि जागृत करने में यह पहल एक मील का पत्थर सिद्ध होगी। अंत में, लखनऊ जी.पी.ओ. के प्रांगण में यह संदेश गूंजा कि राष्ट्र के नायकों का सम्मान ही राष्ट्र का सच्चा भविष्य गढ़ता है।



