अदब की महफिल में सजा सुखन

‘सुखनवर 2.0’ में शायरी और कविता का संगम
उर्दू-हिंदी साहित्यिक परंपरा को मिला साझा मंच
ग़ज़ल, नज़्म और कविता से गूंजा साहित्यिक संसार
निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
उर्दू और हिंदी अदब की साझा और समृद्ध परंपरा को समर्पित ‘सुखनवर 2.0’ शायरी एवं कविता संध्या का आयोजन संपन्न हुआ। सुखनवर एवं साहित्य परंपरा (दिल्ली) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस साहित्यिक संध्या को द अवियान द्वारा प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में ग़ज़ल, नज़्म और कविता की प्रस्तुतियों ने साहित्य प्रेमियों को भाषा, संवेदना और अभिव्यक्ति के विविध रंगों से रूबरू कराया।

शब्दों की शाम
‘सुखनवर 2.0’ में शायरी और कविता के माध्यम से उर्दू-हिंदी अदब की साझा सांस्कृतिक विरासत को सामने रखा गया। रचनाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के जरिए प्रेम, संवेदना, समाज और जीवन के विभिन्न पहलुओं को शब्दों में पिरोया।
दिग्गजों की मौजूदगी
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि श्री अरुणेश मिश्रा रहे। उनके साथ ज्ञान प्रकाश अकुल, श्वेता शुक्ला, कमल किशोर भावुक, आलोक अर्थ, तारिक अब्र, रिंकू सिंह राज, रम्ज़ देहलवी, नीरज पांडेय, अमित पांडेय, राहुल शर्मा, नेम सिंह, अरहम सुल्तानपुर, सफीर रे और अभय विकास सहित प्रमुख शायरों एवं कवियों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं।
अदब का साझा संसार
कार्यक्रम में ग़ज़ल की रवानी, नज़्म की संवेदना और कविता की वैचारिक गहराई ने माहौल को साहित्यिक रंग से भर दिया। अलग-अलग रचनात्मक स्वरों ने हिंदी और उर्दू की साझा साहित्यिक परंपरा की विविधता को सामने रखा।

साहित्य से संवाद
‘सुखनवर 2.0’ केवल काव्य प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि साहित्य और समाज के बीच संवाद का मंच भी बना। कार्यक्रम में मौजूद साहित्य प्रेमियों ने रचनाकारों की प्रस्तुतियों का आनंद लिया और अदब की परंपरा से जुड़े विभिन्न रंगों को महसूस किया।
आयोजकों के अनुसार, इस आयोजन का उद्देश्य हिंदी और उर्दू साहित्य की साझा विरासत को मंच देना तथा कविता और शायरी के प्रति नई पीढ़ी की रुचि को प्रोत्साहित करना रहा। साहित्यिक प्रस्तुतियों से सजी यह शाम शब्दों, संवेदनाओं और अदबी सरोकारों के नाम रही।


