बधिर विद्यार्थियों को सिखाए भारतीय सांकेतिक भाषा के उपयोगी संकेत
विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से बांधा समां

अंतर्राष्ट्रीय बधिर सप्ताह में दो विद्यालयों में जागरूकता और प्रशिक्षण
सांकेतिक भाषा के जरिए संचार अधिकारों और आत्मविश्वास पर जोर
अंतर्राष्ट्रीय बधिर सप्ताह के अवसर पर सोमवार को मोहन रोड स्थित राजकीय संकेत विद्यालय और राजकीय समेकित विशेष विद्यालय में भारतीय सांकेतिक भाषा जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के विशेष शिक्षा संकाय के श्रवण बाधितार्थ विभाग की ओर से आयोजित इन कार्यक्रमों में विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों को दैनिक जीवन में भारतीय सांकेतिक भाषा के उपयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
संचार अधिकारों पर जोर
राजकीय संकेत विद्यालय में विभागाध्यक्ष डॉ. मृत्युञ्जय मिश्रा ने सांकेतिक भाषा की उपयोगिता और बधिर व्यक्तियों के संचार अधिकारों पर विचार रखे। विद्यार्थियों को सप्ताह के दिनों, महीनों और सामान्य शब्दों से जुड़े संकेतों का अभ्यास कराया गया। इसके साथ ही अच्छी और बुरी आदतों से संबंधित करीब 10-10 उपयोगी संकेत भी सिखाए गए।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और सांकेतिक भाषा आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। मंच संचालन डॉ. कौशलेन्द्र कुमार और अतिथि व्याख्याता डॉ. सरिता बाजपेयी ने किया।
प्रशिक्षण के साथ सहभागिता
कार्यक्रम में प्रधानाचार्य हरिशंकर, अनामिका सिंह, दुभाषिया चंद्रानी सोनवानी, पायल चौधरी, त्रिलोक कुमार तथा प्रशिक्षक तोशी और अमरज्योति कौर की सहभागिता रही।
दूसरे विद्यालय में भी जागरूकता
राजकीय समेकित विशेष विद्यालय में भी डॉ. मृत्युञ्जय मिश्रा ने विद्यार्थियों और शिक्षकों को भारतीय सांकेतिक भाषा की उपयोगिता से अवगत कराया। मंच संचालन डॉ. सीताराम पाल ने किया। प्रधानाचार्या पुष्पावती देवी सहित आलोक कुमार सिंह, प्रीति शुक्ला, रागिनी और मीनाक्षी ने कार्यक्रम में सहभागिता की।
दुभाषिया वंदना विश्वकर्मा, अभिषेक कटियार और प्रशिक्षक डब्बलू कुमार ने प्रशिक्षण एवं कार्यक्रम संचालन में सहयोग दिया।
प्रशिक्षुओं ने भी लिया हिस्सा
कार्यक्रमों में बीएड विशेष शिक्षा (एचआई) तृतीय सेमेस्टर के प्रशिक्षुओं के साथ अतिथि व्याख्याता/सहायक आचार्य दानवीर गौतम ने भी सहभागिता की।
इन कार्यक्रमों का उद्देश्य भारतीय सांकेतिक भाषा के दैनिक उपयोग को बढ़ावा देने के साथ बधिर विद्यार्थियों के लिए संचार को अधिक सहज और प्रभावी बनाना रहा।



