राष्ट्रीय

RBSK 2.0 लॉन्च: बच्चों के स्वास्थ्य की निगरानी अब हाईटेक—4D मॉडल के साथ नई बीमारियों पर भी फोकस

जन्म से 18 साल तक संपूर्ण स्वास्थ्य सुरक्षा—डिजिटल ट्रैकिंग और स्क्रीनिंग से बदलेगा बच्चों का भविष्य

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

देश में बाल स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के उन्नत संस्करण राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) 2.0 के दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं। यह पहल न केवल मौजूदा स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करती है, बल्कि बच्चों के लिए एक व्यापक, तकनीक-आधारित और भविष्य-केंद्रित स्वास्थ्य सुरक्षा तंत्र भी तैयार करती है।

RBSK 2.0 का सबसे बड़ा आकर्षण इसका मजबूत “4D मॉडल” है—जन्म के समय दोष, रोग, कमियां और विकासात्मक विलंब—जिसे अब और व्यापक बनाते हुए नई पीढ़ी की स्वास्थ्य चुनौतियों जैसे मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, व्यवहार संबंधी विकार और गैर-संक्रामक रोगों को भी शामिल किया गया है। इससे कार्यक्रम अब केवल बीमारियों के इलाज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बच्चों के समग्र विकास और कल्याण पर भी फोकस करेगा।

नई गाइडलाइंस के तहत जन्म से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चों को कवर करने वाला जीवनचक्र-आधारित दृष्टिकोण और मजबूत किया गया है। आंगनवाड़ी केंद्रों और स्कूलों के माध्यम से मोबाइल स्वास्थ्य टीमों द्वारा नियमित स्क्रीनिंग की जाएगी, जिससे हर बच्चे तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच सकें।

सरकार ने डिजिटल इंडिया मिशन के तहत इस कार्यक्रम को हाईटेक बनाने पर भी जोर दिया है। डिजिटल हेल्थ कार्ड, रियल-टाइम डेटा सिस्टम और एकीकृत प्लेटफॉर्म के जरिए बच्चों के स्वास्थ्य का लगातार ट्रैक रखा जाएगा। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि समय पर इलाज और बेहतर निर्णय लेने में भी मदद मिलेगी।

RBSK 2.0 में रेफरल सिस्टम को भी मजबूत किया गया है, जिससे गांव स्तर की स्क्रीनिंग से लेकर बड़े अस्पतालों तक इलाज की पूरी प्रक्रिया सुचारु रूप से चल सके। इससे इलाज बीच में छोड़ने की समस्या कम होगी और हर बच्चे को निरंतर देखभाल मिल सकेगी।

इसके साथ ही स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला एवं बाल विकास विभागों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया गया है, ताकि बच्चों को एकीकृत और प्रभावी सेवाएं मिल सकें।

Related Articles

Back to top button