उत्तर प्रदेश

योग दिवस की तैयारियों में जागा आयुष विभाग, बरेली का यूनानी कॉलेज अब भी बदहाली का शिकार

इकबाल अहमद और विभागीय अफसरों पर उठे सवाल, 1 साल से बंद पड़ा यूनानी मेडिकल कॉलेज

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क |

उत्तर प्रदेश में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 की तैयारियों को लेकर आयुष विभाग सक्रिय नजर आ रहा है, लेकिन दूसरी ओर बरेली में वर्षों पहले बनकर तैयार हुआ प्रदेश का इकलौता राजकीय यूनानी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल आज भी शुरू होने का इंतजार कर रहा है। विभागीय कार्यशैली और अधिकारियों की भूमिका को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

जानकारी के अनुसार वर्ष 2025 में तैयार हुआ यह यूनानी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल अब तक पूरी तरह संचालित नहीं हो सका। आरोप लगाए जा रहे हैं कि विभागीय राजनीति, ट्रांसफर-पोस्टिंग के खेल और कथित मठाधीशी के कारण यह संस्थान लगातार उपेक्षा का शिकार बना रहा। यूनानी निदेशक के साथ विभागीय बाबू इकबाल अहमद का नाम भी चर्चाओं में सामने आ रहा है, जिन पर कॉलेज को शुरू न होने देने और फाइलों को लंबे समय तक उलझाए रखने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

स्थिति इतनी गंभीर बताई जा रही है कि कॉलेज भवन को किसी अन्य संस्थान को ट्रांसफर करने तक की चर्चाएं और आदेश सामने आ चुके हैं। यूनानी चिकित्सा से जुड़े लोगों का कहना है कि यह केवल एक भवन नहीं बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लाखों लोगों के बेहतर इलाज और शिक्षा का सपना था, जिसे अफसरशाही की भेंट चढ़ा दिया गया।

इसी बीच उत्तर प्रदेश के आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) Dayashankar Mishra Dayalu ने लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर आयुष विभाग के अधिकारियों, चिकित्सकों और महाविद्यालयों के प्राचार्यों के साथ वर्चुअल समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने 21 जून को होने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के प्रचार-प्रसार, औषधीय खेती को बढ़ावा देने और अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के निर्देश दिए।

मंत्री ने ऑपरेशन थिएटर, पैथोलॉजी और एक्स-रे सेवाओं की नियमित मॉनिटरिंग के भी निर्देश दिए और कहा कि आयुष पद्धति एवं योग को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जाए। हालांकि विभागीय बैठकों और दावों के बीच बरेली का बंद पड़ा यूनानी कॉलेज सरकार और विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

यूनानी चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में आयुष और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को मजबूत करना चाहती है तो सबसे पहले वर्षों से तैयार पड़े संस्थानों को शुरू करना होगा। अन्यथा योग दिवस और आयुष प्रचार की चमक के पीछे जमीनी सच्चाई लगातार सवालों के घेरे में बनी रहेगी।

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