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3 प्रवेश द्वारों का होगा निर्माण: जयवीर

  • प्रयागराज-चित्रकूट, बांदा-चित्रकूट एवं कौशांबी-चित्रकूट मार्ग पर प्रवेश द्वार के लिए 05 करोड़ रुपये स्वीकृत

लखनऊ । उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग तीर्थ स्थलों के विकास योजना के अंतर्गत भगवान श्री राम की तपोभूमि चित्रकूट में अब श्रद्धालुओं का स्वागत और भी भव्य रूप में किया जाएगा। चित्रकूट में प्रवेश करने वाले तीन प्रमुख सड़क मार्गों-प्रयागराज-चित्रकूट, बांदा-चित्रकूट एवं कौशांबी-चित्रकूट मार्ग पर भक्ति थीम पर आधारित तीन भव्य प्रवेश द्वारों का निर्माण किया जा रहा है। इस परियोजना के लिए 05 करोड़ रुपए की धनराशि स्वीकृत की गयी है।

यह जानकारी उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि चित्रकूट भगवान राम की तपोभूमि है। वनवास के दौरान प्रभु श्री राम, माता सीता और भाई लक्ष्मण ने साढ़े ग्यारह वर्ष बिताए थे। चित्रकूट से जुड़े तीन प्रमुख मार्ग में भक्ति थीम पर आधारित प्रवेश द्वारों का निर्माण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना है, बल्कि यात्रियों की सुविधा बढ़ाना और राम वन गमन पथ को भव्य बनाना भी है।

जयवीर सिंह ने बताया कि पर्यटन विभाग का उद्देश्य श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को चित्रकूट के विकास के साथ आध्यात्मिक गरिमा का बनाए रखना भी है। प्रवेश द्वारों की संरचना में भगवान श्रीराम, माता सीता एवं लक्ष्मण की छवियों, धार्मिक प्रतीकों, स्थापत्य कला और लोक संस्कृति के मूल भावों को शामिल किया जाएगा। प्रत्येक द्वार स्थानीय स्थापत्य शैली एवं धार्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया जा रहा है, ताकि आने वाले श्रद्धालुओं को चित्रकूट की दिव्यता का अनुभव मार्ग से गुजरने के दौरान प्राप्त हो।

पर्यटन मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश घरेलू पर्यटन में देश में पहले स्थान पर बना हुआ है। वर्ष 2024 में रिकॉर्ड 65 करोड़ पर्यटकों का आगमन हुआ, जो प्रदेश की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को दर्शाता है। प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में चित्रकूट की विशेष भूमिका रही है। चित्रकूट न केवल राम वन गमन पथ का महत्वपूर्ण पड़ाव है, बल्कि यह प्रयागराज-चित्रकूट मार्ग का हिस्सा भी है। अयोध्या, प्रयागराज और वाराणसी मिलकर एक आध्यात्मिक त्रिकोण (स्पिरिचुअल ट्रायंगल) बनाते हैं। चित्रकूट के प्रमुख धार्मिक स्थलों में कामदगिरि पर्वत महत्वपूर्ण है। इसे धार्मिक नगरी का मूल स्थल माना जाता है। श्रद्धालु यहां परिक्रमा कर पुण्य अर्जित करते हैं। गुप्त गोदावरी, हनुमान धारा, सती अनुसूया आश्रम, जानकी कुंड आदि यहां के प्रमुख तीर्थ स्थल हैं।

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