बिना नक्शा-स्वीकृति के खड़े हो रहे बहुमंजिला ढांचे, सिस्टम पर उठे सवाल
कार्रवाई के बाद भी जारी अवैध प्लॉटिंग, प्रशासन की पकड़ पर सवालिया निशान

निश्चय टाइम्स न्यूज नेटवर्क
कानपुर में अवैध निर्माण और अनाधिकृत प्लॉटिंग का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा कार्रवाई में कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) ने करीब 800 वर्गमीटर क्षेत्र में बने अवैध निर्माण को सील किया, लेकिन यह कार्रवाई शहर में फैले बड़े पैमाने पर हो रहे निर्माण घोटाले की एक छोटी झलक भर है।
प्रवर्तन (जोन-1बी) की टीम ने डॉ. रवि प्रताप सिंह के नेतृत्व में नेहरू बाग, मगरवारा (उन्नाव) और सिंहपुर क्षेत्र में दो बड़े निर्माणों पर सीलिंग की कार्रवाई की। इनमें एक निर्माण करीब 700 वर्गमीटर और दूसरा 250 वर्गमीटर में बिना मानचित्र स्वीकृति के खड़ा किया जा रहा था। दोनों ही मामलों में आरसीसी कॉलम और बहुमंजिला ढांचे तैयार हो चुके थे, जिससे साफ है कि अवैध निर्माण लंबे समय से प्रशासन की नजरों से बचता रहा।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतने बड़े निर्माण आखिर बिना अनुमति के कैसे खड़े हो गए? क्या संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी है, या फिर मिलीभगत के बिना यह संभव नहीं? स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी तेज है कि अवैध कॉलोनियों और प्लॉटिंग के जरिए बड़े पैमाने पर आम लोगों को ठगा जा रहा है।
KDA अधिकारियों के अनुसार, शुक्लागंज-उन्नाव क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग और व्यावसायिक निर्माण का सर्वे कराया गया है, जिसमें कई गड़बड़ियां सामने आई हैं। उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम-1973 की धाराओं के तहत कार्रवाई की बात कही जा रही है, लेकिन सवाल यह है कि कार्रवाई पहले क्यों नहीं हुई?
ग्राम गंभीरपुर कछार में भी पांच अवैध प्लॉटिंग चिन्हित की गई हैं, जिन पर 4 अप्रैल को ध्वस्तीकरण की तैयारी है। हालांकि, पिछले अनुभव बताते हैं कि ऐसी कार्रवाइयों के बाद भी अवैध निर्माण का सिलसिला पूरी तरह रुक नहीं पाता।
प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि केवल स्वीकृत कॉलोनियों में ही प्लॉट खरीदें, लेकिन जब अवैध निर्माण खुलेआम हो रहे हों, तो आम नागरिक के लिए सही और गलत की पहचान करना भी चुनौती बन जाता है।



